नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। कर्नाटक में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों की सैलरी में दोगुनी बढ़ोतरी को लेकर विधानसभा में बिल पास हो गया है। इसके अलावा, मुस्लिम कॉन्ट्रैक्टर्स को सरकारी टेंडर में 4% आरक्षण देने का प्रस्ताव भी मंजूर कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री और विधायकों की सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी
सिद्धारमैया सरकार ने “विधानमंडल वेतन, पेंशन और भत्ते संशोध अधिनियम, 2025 पेश किया, जिसे विधानसभा में पारित कर दिया गया। इस बिल के तहत मुख्यमंत्री की सैलरी 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख कर दी गई। तो वही मंत्रियों की सैलरी 60,000 रुपये से बढ़कर 1.25 लाख हो गई, और विधायकों का वेतन 40,000 रुपये से बढ़कर 80,000 रुपये कर दिया गया। विधानसभा और विधान परिषद के सभापति का वेतन 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख हो गया।
भत्तों में भी बढ़ोतरी
सैलरी के अलावा, मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों के भत्तों में भी इजाफा किया गया है। विधायकों की पेंशन 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दी गई। अतिरिक्त पेंशन 5,000 रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गई। पूर्व विधायकों का मेडिकल भत्ता 5,000 से बढ़कर 20,000 रुपये कर दिया गया। क्षेत्रीय यात्रा भत्ता 60 हजार रुपये रुपये से बढ़ाकर 80,000 रुपये कर दिया गया। ट्रेन और हवाई टिकट का वार्षिक भत्ता 2.5 लाख से बढ़ाकर 3.5 लाख कर दिया गया। मंत्रियों का मकान किराया भत्ता 1.2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख किया गया। राज्य मंत्रियों की सैलरी 50,000 रुपये से बढ़ाकर 70,000 रुपये कर दी गई। मुस्लिम ठेकेदारों को सरकारी टेंडर में 4% आरक्षण विधानसभा में पास हुए एक अन्य बिल के तहत अब मुस्लिम ठेकेदारों को सरकारी टेंडर में 4% आरक्षण मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह फैसला अल्पसंख्यकों को आगे बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लिया गया है।
बीजेपी ने किया विरोध
कर्नाटक सरकार के इस कदम पर बीजेपी ने कड़ी आलोचना की है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा,”एक तरफ सरकार अपनी सैलरी बढ़ा रही है, दूसरी तरफ आम जनता पर बोझ डाल रही है। बिजली की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन विधायकों की सैलरी और भत्ते दोगुने हो रहे हैं। वहीं, कांग्रेस सरकार ने इस बढ़ोतरी को जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और बढ़ती महंगाई के लिहाज से जरूरी बताया। सरकारी कर्मचारियों और आम जनता में इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग विधायकों की सैलरी बढ़ाने को अनावश्यक खर्च मान रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि जनप्रतिनिधियों को भी बढ़ती महंगाई के अनुरूप उचित वेतन मिलना चाहिए। अब देखने वाली बात होगी कि क्या विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आगे कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन करता है या नहीं।




