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Sunday, March 22, 2026
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उत्तराखंड में मानसून का तहलका! चार धाम यात्रियों की संख्या 90% तक घटी, गौरीकुंड-केदारनाथ मार्ग हुए बाधित

उत्तराखंड में सक्रिय मानसून का असर चार धाम यात्रा पर साफ नजर आ रहा है। भारी बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण चार धाम यात्रा करीब 90% तक घट गई है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तराखंड में सक्रिय मानसून का असर चार धाम यात्रा पर साफ नजर आ रहा है। भारी बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण चार धाम यात्रा करीब 90% तक घट गई है। केदारनाथ यात्रा मार्ग खास तौर पर प्रभावित हुआ है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे और गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग भूस्खलन की वजह से कई बार बाधित हो चुका है।

केदारनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या घटी

मई 2024 में केदारनाथ में लगभग 6.97 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि जून में यह संख्या 6.18 लाख रही। जुलाई के पहले 9 दिनों में केवल 27,280 श्रद्धालु ही केदारनाथ धाम पहुंच सके हैं। पहले जहां प्रतिदिन 10 से 12 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे, अब यह संख्या घटकर 1,500 से 2,000 हो गई है। केदारनाथ में यात्रियों की कमी से होटलों, दुकानों और अन्य व्यवसायों पर असर पड़ा है। कई होटलों की बुकिंग रद्द हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों की कमाई पर बड़ा असर पड़ा है। केदार घाटी और केदारपुर बाजारों में सन्नाटा पसरा है।

 बद्रीनाथ में भी गिरा होटल कारोबार

बद्रीनाथ धाम में अब तक 11.45 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, लेकिन होटल व्यवसाय पर इसका असर कम नहीं हुआ है। 15 से 20% तक बुकिंग में गिरावट आई है। होटल व्यवसायियों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हैं भारत-पाकिस्तान तनाव के चलते यात्रा से पीछे हटना ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया से असुविधा केदारनाथ में हुई हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं का डर लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन से लोग डरे हुए हैं 15 जून के बाद से होटल बुकिंग में 50% तक गिरावट आई है, जिससे कारोबारी परेशान हैं।

हेमकुंड साहिब में भी कम पहुंचे श्रद्धालु

हेमकुंड साहिब में भी बारिश का असर देखा जा रहा है। बृहस्पतिवार को केवल 534 श्रद्धालु पहुंचे। अब तक कुल 2 लाख 90 हजार से अधिक श्रद्धालु ही दर्शन कर पाए हैं। उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन ने चार धाम यात्रा की रफ्तार थाम दी है। इससे न केवल श्रद्धालु प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि स्थानीय कारोबार, होटल और पर्यटन से जुड़ी आजीविका पर भी बड़ा असर पड़ा है। राज्य सरकार के सामने अब चुनौती है कि कैसे मौसम की मार झेल रहे इस धार्मिक पर्यटन को दोबारा पटरी पर लाया जाए।

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