नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी किसी मंच से देश को संबोधित करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास और धाराप्रवाह अंदाज़ हर किसी को प्रभावित करता है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि वो इतने लंबे और सटीक भाषण बिना अटके कैसे देते हैं? टेलीप्रॉम्पटक के इस्तेमाल से ऐसा करना आसान हो जाता है।
क्या होता है टेलीप्रॉम्प्टर?
टेलीप्रॉम्प्टर एक तकनीकी डिवाइस होता है जो कैमरे के सामने एक पारदर्शी कांच (ट्रांसपैरेंट ग्लास) की तरह लगाया जाता है। इसमें भाषण की स्क्रिप्ट नीचे से ऊपर की तरफ़ धीरे-धीरे स्क्रॉल होती है। वक्ता उस कांच पर देखकर स्क्रिप्ट पढ़ते हुए ऐसा दिखता है जैसे वो सीधे सामने खड़े लोगों से नज़रें मिलाकर बोल रहा हो।
पीएम मोदी के भाषण में दिखता है एक कांच, वही टेलीप्रॉम्प्टर है
अक्सर जब प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान सामने एक कांच जैसा पैनल दिखता है, तो लोग सोचते हैं कि यह उनकी सुरक्षा के लिए है। लेकिन असल में वह टेलीप्रॉम्प्टर होता है जो उनके भाषण को सहज और प्रभावशाली बनाता है। टेलीप्रॉम्प्टर को या तो खुद स्पीकर कंट्रोल करता है या फिर कैमरे के पीछे बैठा कोई टेक एक्सपर्ट। यह ऑपरेटर स्क्रिप्ट की गति को वक्ता के हिसाब से तेज या धीमा कर सकता है ताकि वह आसानी से पढ़ सके।
कितनी होती है टेलीप्रॉम्प्टर की कीमत?
टेलीप्रॉम्प्टर की कीमत इसकी क्वालिटी, ब्रांड और साइज पर निर्भर करती है। एक बेसिक टेलीप्रॉम्प्टर की कीमत लगभग ₹50,000 से शुरू होती है और हाई-एंड मॉडल्स की कीमत लाखों रुपये तक जा सकती है। पीएम मोदी के इस्तेमाल में आने वाले टेलीप्रॉम्प्टर की कीमत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी तो नहीं है, लेकिन माना जाता है कि वो अत्याधुनिक तकनीक से लैस होता है। टेलीप्रॉम्प्टर के इस्तेमाल को लेकर विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री मोदी पर कई बार तंज कसा है। राहुल गांधी ने जनवरी 2022 में दावोस समिट के दौरान तकनीकी गड़बड़ी को लेकर कहा था, “इतना झूठ टेलीप्रॉम्प्टर भी नहीं झेल पाया”। ममता बनर्जी ने 2019 में कहा था कि पीएम मोदी बिना टेलीप्रॉम्प्टर के अंग्रेजी में बोल ही नहीं सकते।
तकनीक का सही इस्तेमाल या आलोचना का मौका?
भाषण के लिए टेलीप्रॉम्प्टर का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। दुनियाभर के बड़े नेता, टीवी एंकर और बिजनेस लीडर इसका इस्तेमाल करते हैं ताकि अपने विचार प्रभावी तरीके से रख सकें। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या तकनीक का इस्तेमाल आलोचना के लायक है, या फिर यह वक्ता की तैयारी और पेशेवर अंदाज़ को दर्शाता है?





