नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारतीय परंपरा और इतिहास में मंदिरों का खासा महत्व है। भारत के मंदिर सिर्फ़ आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं बल्कि इन्हें देश की आर्थिक शक्ति भी माना जा सकता है। हम यहां देश के ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां भक्तों द्वारा चढ़ावा स्वरूप अथाह धन अर्जित करते हैं। धन के अलावा इन मंदिरों में लोग मन्नत पूरी होने पर अपनी इच्छानुसार सोना और चांदी भी दान करते हैं।
अयोध्या का श्री राम जन्मभूमि मंदिर, तिरुवनंतपुरम का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, जम्मू का वैष्णो देवी मंदिर और तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम श्रद्धालुओं के लिए बड़े आध्यात्मिक केंद्र के रूप में माने जाते हैं। ये मंदिर दान, चढ़ावे और पर्यटन से मिलने वाले अरबों डॉलर के धन से बड़ी कमाई हैं। लेकिन क्या आप जाते हैं कि ये मंदिर कितना कमाते हैं?
अयोध्या : श्री राम जन्मभूमि
कई रिपोर्ट बताती हैं कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पिछले पांच साल में लगभग 400 करोड़ रुपये का टैक्स दिया है। ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने खुद यह जानकारी दी थी। यह भारी टैक्स भुगतान भारत में धार्मिक पर्यटन में वृद्धि को दिखाता है। यह राशि 5 फरवरी, 2020 और 5 फरवरी, 2025 के बीच चुकाई गई। इसमें से 270 करोड़ रुपये माल और सेवा कर (GST) के रूप में चुकाए गए, जबकि बाकी 130 करोड़ रुपये विभिन्न अन्य कर श्रेणियों के तहत चुकाए गए। अयोध्या में भक्तों और पर्यटकों की संख्या में दस गुना वृद्धि देखी गई है, जिसने इसे एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र में बदल दिया है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। महाकुंभ के दौरान 1.26 करोड़ भक्तों ने अयोध्या का दौरा किया।
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD)
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सबसे अमीर मंदिर में से एक ट्रस्ट तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने वित्त वर्ष 25 में 1.5 प्रतिशत से भी कम माल और सेवा (GST) का भुगतान किया है। मंदिर की वार्षिक आय 4,774 करोड़ रुपये है, जो कि पूरी तरह से टैक्स फ्री है। हालांकि, मंदिर को प्रसाद की बिक्री, प्रसाद बनाने में लगने वाली सामग्री की खरीदारी आदि में लगने वाली GST का भुगतान करना पड़ता है। इसके तहत मंदिर ने 130 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में सरकार को दिए हैं।
जम्मू : वैष्णो देवी
जम्मू के कटरा में स्थित वैष्णो देवी, एक और समृद्ध मंदिर है जिसने वित्त वर्ष 2024 में 683 करोड़ रुपये कमाए, जिसमें से 255 करोड़ रुपये चढ़ावे से आए, जो कर-मुक्त हैं और 133.3 करोड़ रुपये ब्याज से आए।
तिरुवनंतपुरम : श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर
तिरुवनंतपुरम में प्रतिष्ठित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के सबसे धनी मंदिरों में से एक है। नवंबर 2024 में इस मंदिर ने एक अप्रत्याशित कारण से सुर्खियों में आया। अधिकारियों ने लंबित कर भुगतान पर एक नोटिस जारी किया, जो कि मंदिर की विशाल संपत्ति की तुलना में लगभग नगण्य लग रहा था। मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि बकाया कर मांग सात वर्षों में केवल 1.57 करोड़ रुपये थी, जो कि अकेले 2014 में मंदिर की अनुमानित आय 700 करोड़ रुपये के विपरीत है। मंदिर की आय मंदिरों के विस्तृत वित्तीय खाते सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत के दो सबसे बड़े मंदिर ट्रस्टों ने पिछले सात वर्षों में अपनी संपत्ति दोगुनी कर ली है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, तिरुपति ट्रस्ट का बजट वित्त वर्ष 17 में 2,678 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 5,145 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह, वैष्णो देवी ट्रस्ट की आय वित्त वर्ष 17 में 380 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में 683 करोड़ रुपये हो गई।
जीएसटी भुगतान
जैसे-जैसे मंदिर का राजस्व बढ़ा है, वैसे-वैसे उनका जीएसटी योगदान भी बढ़ा है। उदाहरण के लिए, तिरुपति को ही लें तो पिछले कुछ वर्षों में इसके कर भुगतान में लगातार वृद्धि हुई है। संसद में साझा किए गए विवरण के अनुसार, वित्त वर्ष 17 में, मंदिर ने जीएसटी में 14.7 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जो वित्त वर्ष 22 में बढ़कर 15.58 करोड़ रुपये, फिर वित्त वर्ष 23 में 32.15 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 24 में 32.95 करोड़ रुपये हो गया।
श्री पद्मनाभस्वामी के लिए 2017 से सात वर्षों के लिए जीएसटी देयता 1.57 करोड़ रुपये तय की गई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने यह भी कहा है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 5 फरवरी, 2020 को ट्रस्ट के गठन के बाद पिछले पांच वर्षों में अयोध्या में राम मंदिर के चल रहे निर्माण कार्य में अब तक कुल 2,150 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।




