नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई चल रही है, ऐसा लग रहा है । यहां छत्तीसगढ़-तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर पिछले 16 घंटों से बड़ा ऑपरेशन चल रहा है। जिसमें करीब पांच हजार सुरक्षाकर्मियों ने 300 से ज्यादा नक्सलियों को घेर लिया है। इसमें हिडमा, देवा, दामोदर जैसे कई बड़े नक्सली कमांडर शामिल हैं, जिनकी सुरक्षा बलों को लंबे समय से तलाश थी। बताया जा रहा है कि यह मुठभेड़ करगट्टा, नडपल्ली और पुजारी कांकेर की पहाड़ियों पर हो रही है। नक्सली पहाड़ी पर छिपे हुए हैं, जबकि सुरक्षा बलों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया है। दोनों ओर से लगातार गोलीबारी हो रही है। कहा जा रहा है कि सेना पूरी तैयारी के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम देने में जुटी है।
राज्यों के सेना ने घेरा
बीजापुर जिले से मिली जानकारी में सामने आया है कि जवानों द्वारा माइनिंग हटाई जा रही है, क्योंकि नक्सलियों ने जवानों को निशाना बनाने के लिए 100 से अधिक आईईडी लगा रखे हैं। ऐसे में सुरक्षा बल ड्रोन के जरिए करेगुट्टा पहाड़ पर नजर रख रहे हैं। सुरक्षा बल ड्रोन और उपग्रहों के जरिए स्थिति पर नजर रख रहे हैं। सीआरपीएफ, डीआरजी, एसटीएफ, तेलंगाना से कोबरा और ग्रे हाउंड और महाराष्ट्र से सी-60 के जवान घटनास्थल पर मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि तीनों राज्यों की सेनाओं ने नक्सलियों को चारों तरफ से घेर लिया है। चूंकि सेना के जवान पहाड़ी से नीचे नक्सलियों की हलचल का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए बड़ी कार्रवाई की संभावना है।
नक्सलियों के पास राशन की खपत खत्म
नक्सली अपने साथ राशन लेकर जा रहे हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि पहाड़ी पर छिपे नक्सलियों के पास अब राशन नहीं बचा है। ऐसी स्थिति में वह राशन की तलाश में नीचे आ सकते हैं। यही कारण है कि सुरक्षा बलों ने वहां शिविर स्थापित कर लिया है। चूंकि सुरक्षा बलों ने भी एक सप्ताह की आपूर्ति अपने पास रखी है, इसलिए यह अभियान काफी लंबा चल सकता है। भले ही नक्सली पहाड़ी पर अलग-अलग समूहों में छिपे हुए हैं, लेकिन वे यहां की भौगोलिक स्थिति को भी अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए वे भागने का हर मौका तलाश रहे हैं। सैनिकों को पहाड़ पर चढ़ने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए, ऑपरेशन बहुत सावधानी से किया जा रहा है।
नक्सलियों के पास कोई विकल्प नहीं बचा
आपको बता दें कि, तीन मुख्य नक्सली कमांडर हिडमा, देवा और दामोदर सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं। ये तीनों पुरवती गांव से हैं, जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। यहीं से उन्हें रसद भेजी जाती थी। लेकिन जब से पुजारी कांकेर और नांबी गांव में सुरक्षा बलों ने कार्यालय खोले हैं, तब से यहां से नक्सलियों की सप्लाई बंद हो गई है। तेलंगाना के वेंकटपुरम से भी नक्सलियों तक जरूरी सामान पहुंच रहा था, लेकिन सुरक्षा बलों ने इस चेन को भी तोड़ दिया है। ऐसी स्थिति में नक्सलियों के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। यही कारण है कि यहां सुरक्षा बल पूरी तरह सक्रिय हैं।
ड्रोन हेलिकॉप्टर से इलाकें पर नजर
सेना ड्रोन और हेलीकॉप्टरों से पूरे इलाके पर नजर रख रही है। क्योंकि नक्सलियों ने इस इलाके में बंकर भी बना रखे हैं, इसलिए उनके पास भी भारी मात्रा में हथियार और गोलाबारूद होने की आशंका है। दूसरी ओर, सरकार ने 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने की योजना बनाई है, जिसके चलते फोर्स खुलकर सारा काम कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार और केन्द्र सरकार इस कार्य पर लगातार नजर रख रही है।





