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Monday, March 23, 2026
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लाला लाजपत राय का भाषण सुनकर देशभक्त बने थे पंडित परमानंदः भवानीदीन

हमीरपुर, 06 जून (हि.स.)। सुमेरपुर, वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अंतर्गत जिनका देश ऋणी है, आजादी के संघर्ष के महान सूरमा पंडित परमानंद के जन्मदिन 05 जून पर संस्था के अध्यक्ष डॉ भवानीदीन ने कहा कि पंडित परमानंद सच्चे अर्थों में मां भारती के एक बेजोड़ पुरोधा थे। इनके योगदान को देश कभी नहीं भूल सकता। आजादी के संघर्ष में परमानंद ने अपना पूरा जीवन भारत मां के श्री चरणों में अर्पित कर दिया। ये भाई बहनों में सबसे छोटे थे। इलाहाबाद और बनारस में जीवन के ऊषाकाल में बहुत कुछ सीखा। लाला लाजपतराय के भाषण ने परमानंद के भावी जीवन की दिशा तय कर दी। ये देशप्रेमी हो गये। 1907 तक ये लगभग 14 देशों की यात्रा कर चुके थे, परमानंद गदर आन्दोलन के संस्थापकों में से एक थे, ये सिगापुर विद्रोह के सूत्र धार थे। क्रांति धर्मी होने के कारण परमानंद पुलिस की नजर में चढ़े हुये थे। इनका नाम सुर्खियों में आ चुका था। लाहौर षडयंत्र केस मे धरपकड हुई। 13 फरवरी 1915 को साथियों के साथ परमानंद को फांसी की सजा मिली, जो आगे चलकर कालेपानी की सजा मे बदल गयी, परमानंद ने सेलुलर जेल में 22 वर्ष बिताये, 1937 मे जेल से छूटे। इन्हें जनता ने पंडित की उपाधि से विभूषित किया, तबसे ये पंडित कहलाये। आजादी के बाद भी ये राष्ट्रसेवी बने रहे। 13 अप्रैल 1882 को इनका निधन हो गया। कार्यक्रम में अवधेश कुमार गुप्त एडवोकेट, राजकुमार सोनी सर्राफ, अशोक अवस्थी, रमेशचंद्र गुप्त आदि मौजूद रहे। हिन्दुस्थान समाचार/ पंकज

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