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Saturday, March 21, 2026
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साल 2024 के टॉप 3 ऐसे पॉलिटिकल इवेंट्स जिन्होंने राजनीति की लाइमलाइट लूट ली थी

साल 2024 राजनीति के लिहाज से उतार चढ़ाव वाला रहा है। इस कालखंड के दौरान कई ऐसे पॉलिटिकल इवेंट्स हुए जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साल 2024 कई मायनों मे अहम रहा है। जाते हुए साल कई ऐसी घटनाएं रही जिसने देशवासियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। राजनीति के नजरिए से भी यह साल कई अहम घटनाक्रम लेकर आया। ऐसे ही साल के कुछ चुनिंदा सबसे बड़े पॉलिटिकल इवेंट्स के बारे में बात करेंगे।

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद

साल 2024 का देश का सबसे बड़ा मुद्दा राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद विवाद रहा जिसका न सिर्फ पटाक्षेप हो गया बल्कि 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर का उद्घाटन भी हो गया था। तकरीबन 500 साल के बाद इस विवाद का निपटारा हुआ। वैसे तो यह धार्मिक मुद्दा हो सकता है लेकिन इस मुद्दे राजनेताओं के राजनीतिक बयानों ने इस मुद्दे को भी राजनीतिक रंग दे दिया। प्राण प्रतिष्ठा के दिन तक भी इस बात की चर्चा की जा रही थी कि क्या विपक्ष को इस आयोजन में शामिल होना चाहिए या नहीं। हुआ भी कुछ ऐसा ही जब राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी तो विपक्ष ने इसे राजनीतिक कार्यक्रम करार देकर इसका बॉयकाट किया। 

विपक्षी दल के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी

साल का दूसरा सबसे बड़ा पॉलिटिकल डेवल्पमेंट वो रहा जब एक के बाद एक विपक्ष के बड़े नेता जेल जाने लगे। आम आदमी पार्टी पर लगे शराब घोटाले में आरोपी बनाकर दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया जिसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा था। इसके बाद सांसद संजय सिंह भी इस मामले में घिरते हुए नजर आए और जेल गए। न सिर्फ इतना बल्कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी गिरफ्तार किया गया और उन्हें भी जेल जाना पड़ा था। इस घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार पर आरोप लगने लगे कि वह बदले की भावना से काम कर रही है। झारखंजड के मुख्यमंत्री को भी जेल की हवा खानी पड़ी थी। हालांकि विपक्ष को दावे को उस समय दम मिल गया जब एक के बाद एक सभी नेताओं को कोर्ट से जमानत मिलने लगी थी। यह पूरा कालखंड केवल एक बिंदु के इर्द गिर्द घूम रहा था कि केंद्र सरकार डराकर सरकार चलाना चाहती है।

लोकसभा चुनाव की जीत

इसके बाद अगला पॉलिटिकल इवेंट है लोकसभा के चुनावों में मोदी सरकार की तीसरी बार वापसी। यह मौका ऐतिहासिक इसलिए भी बन गया कि क्योंकि आजाद भारत के इतिहास मे यह तीसरा मौका था जब किसी सरकार ने तीसरी बार वापसी की है। हालांकि सरकार के लिए यह एक ऐसा मौका था जब बीजेपी के नेतृ्त्व वाली सरकार का आंकड़ा गिर गया था। बीजेपी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा छूने में नाकाम रही थी। विपक्ष भी उस चुनाव में अपना प्रदर्शन सुधारने में कामयाब रहा था, विशेषकर उत्तर प्रदेश में। बीजेपी के लिए निजी तौर पर यह बड़ा इवेंट इसलिए भी है क्योंकि इसी कार्यकाल में वह विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन गई। मौजूदा समय में बीजेपी के 18 करोड़ सदस्य हैं।

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