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Saturday, April 4, 2026
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उत्तराखंड के स्कूलों में अब पढ़ाई जाएगी भगवद्गीता, मुख्यमंत्री धामी ने समीक्षा बैठक में लिया महत्वपूर्ण निर्णय

उत्‍तराखंड की धामी सरकार ने स्‍कूलों के पाठ्यक्रम को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। राज्‍य के सभी सरकारी स्कूलों में अन्य विषयों के साथ भगवद् गीता भी पढ़ाई जाएगी।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक अहम निर्णय लिया है, जिसका असर राज्य के लगभग 17 हजार सरकारी स्कूलों में जल्द ही देखने को मिलेगा। अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में भगवद् गीता को पढ़ाया जाएगा।

यह फैसला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि NCERT को इस कार्य की जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि स्कूलों में गीता को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके। जल्द ही इस निर्णय का प्रभाव स्कूलों में दिखने लगेगा। आइए जानते हैं कि मुख्यमंत्री धामी ने इसको लेकर क्‍या कहा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्या कहा?

भगवद् गीता को उत्तराखंड के सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “भगवद् गीता एक पवित्र ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया वह ज्ञान संकलित है, जो यदि ध्यानपूर्वक पढ़ा जाए तो व्यक्ति के पूरे जीवन में उपयोगी साबित होता है। हमने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में निर्णय लिया है कि राज्य के सभी स्कूलों में गीता पढ़ाई जाएगी और इस दिशा में कार्य शुरू भी कर दिया गया है।”

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड के लिए चार धाम यात्रा, आदि कैलाश यात्रा और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसी कई ऐतिहासिक योजनाएं शुरू की गई हैं। इन सभी विषयों पर हमने प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त किया है और उन्हें ऐतिहासिक स्वरूप देने का प्रयास किया है।”

शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत की प्रतिक्रिया

सरकारी स्कूलों में भगवद् गीता पढ़ाने के निर्णय पर उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा, “शिक्षा विभाग की एक बैठक में हमने NCERT को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वह उत्तराखंड के 17,000 सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में भगवद् गीता और रामायण को शामिल करे। जब तक पाठ्यक्रम में यह बदलाव औपचारिक रूप से लागू नहीं होता, तब तक सभी स्कूलों में दैनिक प्रार्थना सभा के दौरान भगवद् गीता और रामायण के श्लोकों का पाठ अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।”

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