नई दिल्ली रफ्तार डेस्क: गणेश चतुर्थी का उत्सव हर साल देश के तमाम हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 18 सितंबर से शुरू है। और यह त्योहार 10 दिनों तक मनाया जाएगा। इसके बाद 28 सितंबर को गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाएगा। गणेश जी की पूजा तो हम सभी करते हैं। वैसे अगर देखा जाए तो गणेश जी के शरीर के बनावट सभी देवी देवताओं से भिन्न है। लेकिन इसके पीछे कई वजहें हैं। क्या आप जानते हैं उनके शरीर के किसी न किसी एक अंग का एक अलग ही महत्व है। इसलिए भगवान गणेश का हर एक अंग कोई न कोई एक संदेश देता है जिसे लोग अक्सर समझ नहीं पाते। अगर आप भी गणेश भगवान के भक्त हैं और इस बार गणेश चतुर्थी अपने घर लाने की सोच रहे हैं तो पूजा के साथ उनके गुणों को भी उतारने की कोशिश करें।
गणपति का सिर :
जैसा कि आप लोगों को पता होगा कि भगवान गणेश और उनके पिता भोलेनाथ के बीच एक लड़ाई हुई थी। जिसमें भगवान शिव ने उनका सिर धड़ से अलग कर दिया था। और इसके बाद उन्होंने हाथी का सिर लगाया था। भगवान गणेश का सिर काफी बड़ा है जो यह सिखाता है कि व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि बुद्धि और विवेक के बल पर व्यक्ति बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकता है। इसके अलावा अपनी सोच को हमेशा बड़ा रखना चाहिए।
गणेश जी की छोटी आंखें :
भगवान गणेश की आंखें काफी छोटी है। जो गंभीर होने के साथ चिंतन करने का प्रतीक है। गणपति की आंखों से हमें यह सीख मिलती है कि किसी भी परिस्थिति में चिंता की बजाय चिंतन करना चाहिए। और इसके बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचना चाहिए। चिंतन व्यक्ति के स्वभाव में गंभीरता लाता है। साथ ही उसे गंभीर परिस्थिति का मार्ग दिखाता है।
गणपति के बड़े कान :
आपने भगवान गणेश जी के बड़े बड़े कान देखें होंगे ये कान यूं ही बहुत बड़े-बड़े होते है। इसके पीछे का रहस्य ये है कि ये व्यक्ति को चौकन्ना रहने की प्रेरणा देते हैं। इसके अलावा गणपति के कानों से यह सीख मिलती है। जो भी ज्ञान की बात कहे उसे ध्यान से सुने, चिंतन करें और उसे समझकर ही फैसला करें।
गणेश जी की सूंड :
गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती रहती है। जो इस बात की सीख देती है कि व्यक्ति को हर परिस्थिति में एक्टिव रहना चाहिए। एक्टिव रहने वाला व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दोनों तरफ से फिट रहता है।
गणपति का पेट :
गणपति जी का पेट बहुत बड़ा होता है। इसके पीछे का रहस्य ये है कि हमें इससे ये सीख मिलती है कि जीवन में काफी कुछ सीखने, देखने और सुनने को मिलेगा l। जो सही है उसे अपने पेट में पचा लो। यदि आपने यह कला सीख ली तो आप हर फैसले को सूझबूझ से ले पाएंगे।
गणपति की सवारी :
इतने भारी भरकम शरीर वाले गणपति ने मूषक को अपना वाहन क्यों बनाया है। यह इस बात का संकेत है कि संसार में कोई भी कुछ नहीं है हर किसी की अपनी उपयोगिता और क्षमता है । इसलिए हर व्यक्ति को हर किसी को सम्मान की नजर से देखना चाहिए। फिर चाहे वो छोटा हो बड़ा हो , अमीर हो गरीब हो , विकलांग हो ।





