नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पटना स्थित दफ्तर के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर लिखा है, “अब पार्टी की कमान संभालें निशांत” और “नीतीश सेवक मांगें निशांत”। ये पोस्टर ऐसे समय में लगे हैं जब जदयू ने राज्य में सदस्यता अभियान की शुरुआत की है। हालांकि, पार्टी ने साफ कर दिया है कि राजनीति में कदम रखने का अंतिम फैसला निशांत के ऊपर ही है।
अटकलों की शुरुआत
शुक्रवार को जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने निशांत का नाम लेकर पहली बार चर्चा छेड़ी। पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि पार्टी के सदस्य, शुभ चिंतक और समर्थक चाहते हैं कि निशांत पार्टी में शामिल हों और सक्रिय भूमिका निभाएं, लेकिन यह निर्णय पूरी तरह निशांत का है। इस दौरान निशांत खुद झा के साथ मौजूद थे।
कौन हैं निशांत कुमार?
निशांत कुमार, 20 जुलाई 1975 को जन्मे, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा के इकलौते पुत्र हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट केरन्स स्कूल से पूरी की और इसके बाद मसूरी के मानव भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षा ग्रहण की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। वर्ष 2017 में निशांत ने स्पष्ट किया था कि उनका राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है और वे आध्यात्मिक जीवन अपनाना चाहते हैं।
सदस्यता अभियान और राजनीति में संकेत
जदयू ने 2025 से 2028 तक सदस्यता अभियान शुरू किया, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी निशांत का जिक्र किया और कहा कि उनका शामिल होना पार्टी के लिए लाभकारी होगा। इसी बीच पटना के दफ्तर में लगे पोस्टर और हालिया सार्वजनिक कार्यक्रमों से संकेत मिल रहे हैं कि निशांत की राजनीति में एंट्री की संभावना बन रही है।
पटना और जदयू के राजनीतिक गलियारों में अब निशांत कुमार की राजनीति में संभावित एंट्री पर चर्चा गर्म है। पार्टी समर्थक और सदस्य उनके कदमों पर नजर रखे हुए हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय पूरी तरह निशांत के हाथ में है और अभी तक उन्होंने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।





