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हरदा पटाखा फैक्टरी में मौत का तांडव, धुआं-धुआं हुआ इलाका, सड़कों पर बिछी लाशें, जानें मौत का खौफनाक मंजर

Harda Fire: मध्य प्रदेश के हरदा में पटाखे की फैक्टरी में लगी भीषण आग से मौत का खौफनाक मंजर ने लोगों को रौंगटे खड़े कर दिए हैं। लगातर धमाकों से धरती भी कांप गई।

नई दिल्ली, रप्तार डेस्क। मध्य प्रदेश के हरदा जिले के बैरागढ़ गांव में पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लगने से चारों ओर मौत का खौफनाक मंजर दिखा। देखते ही देखते आग का सैलाब फैक्टरी से बाहर आ गया। जिससे आस पास के 60 से अधिक घरों को खाली करवाना पड़ा। इस हादसे में अबतक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, और 64 लोग घायल हो गए हैं। आग की लपटें इतनी तेज थी कि 2 किलोमीटर से साफ दिखाई पड़ रही थीं। यह मंजर इतना खौफनाक था कि किसी के भी रौंगटे खड़े हो जाएंगे। लगातार धमाको से धरती कांप गई

स्थानीय लोगों ने क्या कहा?

बैरागढ़ गांव के रहने वाले एक निवासी ने कहा कि “पहले हमें लगा कि भूकंप आया है, इस धमाके से जमीन हिल गई। चारों ओर भागा दौड़ी मच गई, आग का इतना खौफनाक मंजर हमने अपनी जिंदगी में पहली बार देखा।” पटाखा फैक्टरी में एक के बाद एक लगातार पटाखे फटने के धमाके से लोगों में डर का माहौल पैदा हो गया।

मृतकों और घायलों को मिलेगा मुआवजा

मध्य प्रदेश सरकार में कार्यरत मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने स्थानीय हरदा अस्पताल में घायलों से मिलने पहुंचे। वहां, एक घायल ने बताया कि हम हादसे वाली जगह से 1 किलोमीटर दूर थे। ब्लास्ट के बाद बाइक पर कुछ गिरा और हम घायल हो गए। सीएम मोहन यादव ने इस हादसे में सख्त से सख्त कार्यवाई के आदेश दिए हैं। सीएम मोहन यादव ने ऐलान किया कि “हमले में मृतकों कों 4-4 लाख रुपये का मुआवजे का ऐलान किया और घायलों के लिए 50-50 हजार का मुआवजा मिलेगा।

धमाके में पूरा गांव खाक

इस हादसे से पूरा गांव सदमे में है, पटाखे की फैक्टरी धमाके से पूरी गांव खांक हो गया है। इस खतरनाक हादसे से सबक लेते हुए इंदोर में डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट ने पटाखों की दुकानों को सील करने का आदेश दिया है। यह धमाका इतना खतरनाक था कि लोगों के घरों के दरवाजे और खिड़िकियां तक टूट गईं। कुछ पल तक लोगोंं को समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ है।

अवैध फैक्टरी को किसने दिया लाइसेंस?

इस हादसे से सरकार को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। क्योंकि इन हादसों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फैक्टरी के मालिक अवैध तरीके से पटाखा की फैक्टरी रिहायशी इलाके में चला रही थी। जिसमें करीब 250 लोग काम करते थे। इसमें सबसे पहले सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी अवैध फैक्टरी को रिहायशी इलाके में संचालित करने का किसने लाइसेंस दिया? दूसरा सवाल यह कि इतनी बड़ी अवैध फैक्टरी सरकार के नाक के नीचे कैसे संचालित हो रही थी? तीसरा सवाल यह कि क्या सरकार और प्रशासन इस अवैध फैक्टरी से अंजान थी?

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