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Wednesday, March 18, 2026
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Delhi: स्वाति मालीवाल मामले में दिल्ली पुलिस हैरान, कैसे सुलाझेगा कन्फ्यूजन से भरा केस; क्या कहता है कानून?

New Delhi: स्वाति मालीवाल द्वारा अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव पर मारपीट के आरोप ने दिल्ली पुलिस को गहरे संकट में डाल दिया है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कथित तौर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव पर आरोप लगाया है कि बिभव कुमार ने उनके साथ सीएम आवास पर मारपीट की है। इस मामले ने दिल्ली पुलिस को कन्फ्यूजन में डाल दिया है।

उलझन में फंसी दिल्ली पुलिस

नॉर्थ दिल्ली के डीसीपी मनोज मीणा ने न्यूज 18 हिंदी को बताया कि “स्वाति मालीवाल ने अबतक मामले में FIR दर्ज नहीं कराई है। पुलिस की टीम ने स्वाति मालीवाल से लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि जब तक इस मामले की शिकायत थाने के SHO को नहीं मिल जाती तब तक पुलिस कार्यवाई को आगे नहीं बढ़ाएगी। मालीवाल द्वारा किए गए PCR कॉल को अभी पेंडिंग रखा गया है।” इससे बात साफ है कि पुलिस तभी ऐक्शन ले सकती है जब स्वाति मालीवाल खुद शिकायत दर्ज कराएंगी। 13 मई को मालीवाल ने दिल्ली पुलिस की इमरजेंसी हेल्पलाइन नम्बर पर फोन करके पुलिस को बताया था कि उनके साथ अरविंद केजरीवाल के आवास पर उनके निजी सचिव बिभव कुमार ने मारपीट की है। सिविल लाइंस थाने की पुलिस जब सीएम आवास पहुंची तब तक स्वाति मालीवाल घटनास्थल से रवाना हो चुकी थीं। पुलिस ने जब उनसे संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि वे बाद में शिकायत दर्ज कराएंगी।

बीजेपी ने किया विरोध-प्रदर्शन

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने 14 मई को प्रेस कॉन्फ्रैंस में कहा कि स्वाति मालीवाल के साथ सीएम आवास पर उनके निजी सचिव बिभव कुमार ने बदसलूकी है। उन्होंने मीडिया को बताया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिभव कुमार के खिलाफ सख्त ऐक्शन का आदेश दिया है। इस घटना को 2 दिन हो गए हैं। स्वाति मालीवाल ने चुप्पी साध रखी हैं। उन्होंने अबतक कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराई। इस मामले में बीजेपी ने आज सीएम आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया।

क्या कहता है कानून?

दिल्ली पुलिस के पूर्व ज्वाइंट सीपी एसबीएस त्यागी न्यूज 18 हिंदी को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं से संबंधित आपराधों में पहले से ही FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। किसी महिला के साथ अगर कोई अपराध होता है तो वह न केवल PCR कॉल बल्कि मौखिक, लिखित या टेलिफोनिक कॉल के जरिए भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ललिता कुमारी वर्सेज यूपी स्टेट मामले में जजमेंट दिया था कि किसी भी गंभीर अपराध की शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधिकारी को बिना किसी देरी के FIR दर्ज करना आवश्यक है। अगर पुलसि को मामला संदिग्ध लगता है तो पुलिस थोड़ा रुक सकती है। पुलिस को 7 दिनों के अंदर कार्यवाई करनी होती है। इसके अलावा महिलाओं के साथ मारपीट वाले मामलों में पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट लेना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। पुलिस मामले की छानबीन के लिए लोगों से पूछताछ भी कर सकती है और CCTV फुटेज की छानबीन भी कर सकती है। पीड़िता को पुलिस को अपना पूरा बयान देना जरुरी है। कोर्ट में जब मामला दर्ज होता है तब भी जज के सामने पीड़िता को जज के सामने अपना बयान देना अनिवार्य है।

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