नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क।हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी का बहुत महत्त्व है.वहीं इस बार 6 सितम्बर से इसकी शुरुआत हो रही है. लोग घर में बप्पा का आसन सजाने को तैयार है। साथ ही बाज़ार में भी पूजा की चीजों का लोग जोर सोर से खरीदारी कर रहे है. गणपति की पूजा में कई चीजों का इस्तेमाल होता है और ये पूजा कई तरह की विधियों से होती है।
गणेश पूजा से जुड़ी वस्तुओं को लेकर लोगों के दिमाग में कई तरह की कन्फूशन रहती है। आइये हम आपका ये कन्फूशन दूर करते है और बताते है उन वस्तुओं के बारे में।
दूर्वा
दूर्वा घास का छोटा टुकड़ा होती है और गणेश जी को अत्यंत प्रिय है. मान्यता के अनुसार एक बार गणेश जी भगवानों की रक्षा करने के लिए सभी राक्षसों को निगल गए थे। और उनके पेट में जलन होने लगी है तब कश्यप नमक एक ऋषि ने उन्हें दूर्वा की गांठ खिला दी थी और उनकी जलन ठीक हो गयी तब से ही गणेश जी को दूर्वा अर्पित की जाती है।
चावल
चावल के ऊपर ही भगवान गणेश की मूर्ति रखी जाती है। गणेश जी को सुख समृद्धि का देवता कहा जाता है. और चावल धान से होता और धान का सम्बन्ध धन से है। चावल को अक्षत भी कहते है और ये बहुत शुभ माना जाता है. इसलिए भगवान गणेश की पूजा में अक्षत अनिवार्य है।
अशोक के पत्ते
आमतौर पर आप प्रवेश द्वार पर अशोक के पत्ते से सजावट करते ही होंगे पर गणपति पूजा में इसे लगाना अनिवार्य होता है। इसके अलावा सुगंधित फूलों से भी घर को सजाते है. गेंदे के फूल का माला भगवान गणेश को जरुर चढ़ाते है क्योंकि वो उन्हें बहुत प्रिय है।
मोदक या लड्डू
गणेश जी की पूजा बिना मोदक या लड्डू के नहीं होती। गणेश जी को सभी व्यंजनों में मोदक प्रिय है और इसके प्रसाद से ही गणपति पूजा की शुरुआत की जाती है।




