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Thursday, March 5, 2026
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Kajri Teej, Hartalika Teej के अलावा कितने प्रकार की होती है तीज? कब मनाई जाती है? क्या है इनका महत्व?

एक साल में तीन बार आती है तीज, मुख्य रूप से सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए करती हैं इस दिन व्रत और पूजा अर्चना।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हमारे यहां तो Kajri Teej मनाते हैं, नहीं हमारे यहां तो Hartalika Teej होती है… आपने अक्सर लोगों को ये कहते सुना होगा। आज कजरी तीज है और इन दोनों से पहले आती है हरियाली तीज। देश के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तीज मनाई जाती है। तीनों तीजों में महिलाएं अपने सुहाग के लिए पूजा-अर्चना करती हैं।

हरियाली तीज

हिंदू परंपरा के अनुसार हरियाली तीज का त्योहार तुरंत शादी करने और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

इन दिन हरे रंग का बहुत महत्व होता है। इस दिन हरे कपड़े पहनकर शिव भगवान की पूजा की जाती है। सौभाग्यवती महिलाएं इन दिन हरी चूड़ी पहनती हैं, आलता लगाती हैं और झूला भी झूलती हैं। इस दिन पानी के देवता वरुणदेवता की पूजा की जाती है।

इन दिन माता पार्वती की मांग से जो स्त्रियां सिंदूर लेती हैं उनकी मनोकामना पूरी होती है। इस दिन मंदिर में जाकर शिव जी पर जल चढ़ाने का बड़ा ही महत्व है। इस दिन किसी सुहागन स्त्री को सुहाग का सामान देने से आपके सुहाग की लंबी उम्र होती है।

कजरी तीज

इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत करती हैं। इन दिन वो पति की लंबी आयु के लिए भगवान शंकर और पार्वती माता की पूजा करती हैं। इस तीज के कजली तीज, सातूड़ी तीज के रूप में भी मनाया जाता है।

इस दिन पूजा करने वाली महिलाएं सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण कर लें। इसके बाद अपने मंदिर को सजाएं। चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर शिव परिवार की तस्वीर उस पर रखें और भगवान को चंदन का तिलक लगाकर केसर, अक्षत, फल, जल आदि अर्पित करें।

प्रसाद में खीर, दही और पंचमेवे चढ़ा सकते हैं। यह पूजा संतान के लिए भी होती है। इस पूजा को करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।इस साल 22 अगस्त को कजरी तीज मनाई जा रही है। 

हरतालिका तीज

इस तीज पर भी मुख्य रूप से भगवान शिव और पार्वती माता की अराधना की जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं। ऐसा माना जाता है कि पार्वती माता ने भी यह व्रत शिव भगवान के लिए रखा था और तभी उन्हें शिव जी मिले थे।

इस साल 6 सितंबर 2024 को यह त्योहार मनाया जाएगा है। इन दिन हाथ से बनी मूर्तियों या मिट्टी से बनाई गई मूर्तियों की पूजा करना शुभ माना जाता है।

इस दिन सबसे पहले भगवान गणेश, भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा शुरू करें। अब वेदी को केले के पत्तों, फूलों से सजाएं और मूर्तियों के माथे पर कुमकुम लगाएं। इस दिन व्रत कथा पूरा करने के बाद पार्वती माता को सुहाग का सामान अर्पित करें। विवाहित महिला को दान देना और भजन-कीर्तन करना इस दिन शुभ माना गया है। बिहार और उत्तर प्रदेश में यह त्योहार मुख्य रूप से मनाया जाता है।

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