महिलाओं को कैंसर से बचने के लिए जरूर कराने चाहिए ये 5 टेस्ट

एक उम्र के बाद महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के चांसेस बढ़ जाते हैं। कैंसर से जान बचाने के लिए ज़रूरी है कि बीमारी जल्द से जल्द पकड़ में आ जाए।
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तोनई दिल्ली, रफ्तार डेस्क: कैंसर एक जानलेवा बीमारी है। कई बार कैंसर के लक्षण न तो दिखते हैं और न ही समझ आते हैं। इस वजह से कैंसर के पकड़ में आने में देर हो जाती है और ये बीमारी जानलेवा बन जाती है। हालांकि, कैंसर का पता अगर सही समय पर चल जाए तो इसका इलाज संभव है। इसलिए कुछ टेस्ट्स ऐसे हैं जो महिलाओं को समय-समय पर करवाते रहने चाहिए।

बॉडी स्क्रीनिंग

बॉडी स्क्रीनिंग के जरिए शरीर में कैंसर का पता लगाया जा सकता है।  डॉक्टर इस स्क्रीनिंग में आपके शरीर में बन रही विभिन्न प्रकार की गांठ का पता लगाने की कोशिश करते हैं।  इस दौरान अगर इन गांठ में कोई बदलाव या स्किन का रंग में बदलाव होता है तो वो कैंसर से जुड़े टेस्ट्स रिकमेंड करते हैं।

एंडोमैटेरियल टिशु टेस्ट

इसमें एंडोमेट्रियल सेल्स में किसी तरह की खराबी के बारे में पता लगाया जाता है।  इससे यूटेराइन कैंसर का खतरा रहता है। इसलिए महिलाओं को यह  टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड से महिलाओं पेल्विक हेल्थ की जांच की जाती है। ओवरी, यूटेरस, वजाइना की जांच इस अल्ट्रासाउंड से हो जाती है।

पैप स्मीयर टेस्ट

30 की उम्र के बाद महिलाओं को हर तीन साल में पैप स्मीयर टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। इस टेस्ट में वजाइनल टिशू का सैम्पल लेकर देखा जाता है कि ह्यूमन पेमीलोमा वायरस तो नहीं है, इस वायरस की वजह से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर हो सकता है।

कॉलपोस्कोपी

अगर पैप स्मीयर टेस्ट किसी तरह की दिक्कत आती है।  तो डॉक्टर कोलपोस्कोपी टेस्ट करने की सलाह देते हैं। इसमें सर्विक्स का सूक्ष्मता से अध्ययन किया जाता है। तब जाकर कैंसर की पहचान होती हैं। 

ब्रेस्ट एग्जामिनेशन

महिलाओं को समय-समय पर ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करने की सलाह दी जाती है। ब्रेस्ट में किसी भी तरह की गांठ का पता चलने पर उन्हें डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर गांठ की जांच करते हैं कि वो कैंसरस है या नहीं।

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