खुश रहना चाहते हैं तो ‘Happy Hormones’ की पड़ती है जरूरत, इन उपायों से मिलेगा फायदा

खुश रहना है तो आप हैप्पी हार्मोन जरूर होना चाहिए। इन चीजों से आपको काफी लाभ हो सकता है।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क| आजकल की तनाव भरी जिंदगी में सभी को मानसिक शांति और खुश रहना काफी जरूरी है। वहीं बढ़ता तनाव मानसिक और शारीरिक दोनों स्थिति को प्रभाव करना होता है। खुश रहना है तो शरीर में हैप्पी हार्मोन होना चाहिए है। अगर बाॅडी में हैप्पी हार्मोन नहीं है तो मन में पूरी तरह से उदासी रहती है। वहीं चेहरे पर मुस्कान नहीं नजर आती है। अगर हैप्पी हार्मोंस कम होते हैं तो इंसान अच्छा महसूस नहीं करता है।

हैप्पी हार्मोन का काम लोगों को खुश करना है। अच्छा महसूस करवाने वाला हार्मोन का स्तर कम होने से काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर आप खुशी चाहते हैं तो इन हार्मोन को बढ़ा सकते हैं। जान लेते हैं कि हार्मोन कितने तरह के हैं। इसका स्तर बढ़ाना है किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

हैप्पी हार्मोन क्या है

सलाहकार मनोचिकित्सक रूबी हॉल क्लिनिक के डॉक्टर पंकज बी बोराडे ने कहा कि हैप्पी हॉर्मोन चार तरह के रहते हैं। डोपामाइन, सेरोटोनिन, एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन को हैप्पी हार्मोन के रूप में मशहूर है। इन हॉर्मोन की मदद से हम काफी प्रसन्न होते हैं।

एंडोर्फिन हॉर्मोन ब्रेन को शांत रखने में मदद करता है। काम पूरा होने के साथ आपको खुशी का एहसास होता है। ये फीलिंग डोपामाइन हॉर्मोन की वजह से होती है। रिश्तों में लव का बांडेशन ऑक्सीटोसिन ​हार्मोन की वजह से होता है। पाचन शक्ति को दुरस्त रखने है तो सेरोटोनिन हॉर्मोन अहम भूमिका निभाता है। हैप्पी हॉर्मोन को बढ़ाने के लिए आप इन खास टिप्स पर ध्यान देना चाहिए।

-नियमित व्यायाम एंडोर्फिन, डोपामाइन और सेरोटोनिन हॉर्मोन रिलीज होते हैं और आपके मूड बेहतर होता है।

-हर चीज के लिए धन्यवाद देने का अभ्यास सेरोटोनिन का स्तर में बढ़ोतरी करने में मदद करता है और खुशी की भावना बढ़ने लगती है।

-अपनों के साथ समय बिताने से ऑक्सीटोसिन रिलीज होने लगता है, जिससे खुशी और सेहत बेहतर होती है।

-जिन कामों को करने से आनंद होता है उनमें मसरूफ होने से डोपामाइन हॉर्मोन रिलीज होते हैं।

-पर्याप्त नींद लेने से सेरोटोनिन और डोपामाइन सहित हार्मोन पूरी तरह से संतुलित रहता है।

-भरपूर हेल्दी डाइट लेने से सेरोटोनिन हॉर्मोन का उत्पादन करने में मदद मिलती है।

-हंसने और मुस्कुराने से एंडोर्फिन हॉर्मोन की वृद्धि होती है और मस्तिष्क में एक सकारात्मक प्रतिक्रिया बढ़ने लगती है।

-मेडिटेशन का अभ्यास से तनाव कम होता है और एंडोर्फिन और सेरोटोनिन हॉर्मोन से लाभ मिलता है।

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