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Tuesday, March 24, 2026
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West Bengal Assembly Elections 2026: तमलुक सीट पर कौन लहरा सकता है जीत का परचम? जानिए किस ओर करवट ले रहे हैं समीकरण

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जोर शोर से अपने रंग में आ रहा है। इस चुनावी चकल्लस के बीच तमलुक विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल में 294 निर्वाचन क्षेत्र है जिसमें से तमलुक विधानसभा सीट का अपना महत्व है। यह एक सामान्य सीट है जो SC/ST के लिए आरक्षित नहीं है। विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही इस सीट को लेकर चर्चा तेज होने लगी है। हालांकि मौजूदा समय में यह सीट सत्ताधारी TMC के खाते में है। साल 2021 के West Bengal Assembly Elections 2026 में टीएमसी के सौमेन महापात्रा ने भारतीय जनता पार्टी के हरे कृष्ण बेरा को 793 वोटों के अंतर से हराया। लेकिन लोकसभा आते आते तस्वीर पलट गई। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अभिजीत गंगोपाध्याय ने तमलुक लोकसभा से 77,733 वोटों के अंतर से तृणमूल कांग्रेस के देबांग्शु भट्टाचार्य को हराकर जीत हासिल की थी।

कैसे रहे हैं साल 2016 और 2021 के चुनावी परिणाम

साल 2016 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो तमलुक विधानसभा के नतीजे काफी दिलचस्प रहे थे। गिनती के आखिरी फेज तक नहीं समझ आ रहा था कि कौन सा उम्मीदवार जीत सकता है। हालांकि गिनती की समाप्ति पर CPI उम्मीदवार अशोक डिंडा ने 520 वोटों से सीट जीत ली। उन्हें 95,432 वोट मिले। वहीं तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार निर्बेद रॉय को 94,912 वोट मिले और वह उपविजेता रहे।

जबकि साल 2021 में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार सौमेन महापात्रा ने 793 वोटों के अंतर से तामलुक सीट जीती। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार हरे कृष्ण बेरा को पटखनी दी थी।

तमलुक विधानसभा सीट पर पिछले विजेता


2021: सौमेन महापात्रा (तृणमूल कांग्रेस)
2016: अशोक डिंडा (सीपीआई)
2011: सौमेन महापात्रा (तृणमूल कांग्रेस)
2006: जगन्नाथ मित्रा (सीपीआई)
2001: निर्बेद रॉय (तृणमूल कांग्रेस)
1996: अनिल मुदी (कांग्रेस)
1991: अनिल मुदी (कांग्रेस)
1987: सुरजीत बागची (सीपीआई)
1982: बिश्वनाथ मुखर्जी (सीपीआई)
1977: बिश्वनाथ मुखर्जी (सीपीआई)
1972: अजय मुखर्जी (कांग्रेस)
1971: अजय मुखर्जी (कांग्रेस)
1969: अजॉय मुखर्जी (बांग्ला कांग्रेस)
1967 उपचुनाव: अजॉय मालाकार (बांग्ला कांग्रेस)
1967: अजय मुखर्जी (कांग्रेस)
1962: अजय मुखर्जी (कांग्रेस)
1957: अजय मुखर्जी (कांग्रेस)

निष्कर्ष के तौर पर कहें तो चुनावी समर में इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है कि कौन सी पार्टी यहां दबदबा रखती है और कौन सी पार्टी यहां कमजोर है।

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