नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा से लोकतंत्र को आहत करने वाली खबर आई। अल्पसंख्यक बिल पर चर्चा के दौरान दोनों पक्षो में टकराव की स्थिति बन गई और विधायक आपस में भिड़ गए। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को सदन से सस्पेंड कर दिया गया है।
बंगाल विधानसभा में हंगामा, बीजेपी-TMC विधायकों के बीच झड़प में शंकर घोष घायल, शुभेंदु अधिकारी निलंबित
नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब बीजेपी और टीएमसी विधायकों के बीच तीखी बहस मारपीट में तब्दील हो गई। इस दौरान बीजेपी के मुख्य सचेतक शंकर घोष (व्हिप चीफ) की विधानसभा के सुरक्षा कर्मियों और मार्शलों के साथ झड़प हो गई, जिसमें उन्हें चोटें आईं। इस घटना को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने बीजेपी के व्हिप चीफ को सदन से निलंबित कर दिया। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को भी सस्पेंड कर दिया गया है। शुभेंदु अधिकारी ने घटना का वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर शेयर किया है।
कैसे मचा बंगाल विधानसभा में बवाल ?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को उस समय माहौल बेकाबू हो गया, जब बीजेपी विधायक शंकर घोष को सदन से बाहर निकालने की कोशिश में मार्शलों और बीजेपी विधायकों के बीच जोरदार हाथापाई हो गई। दरअसल, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने विपक्षी नारेबाजी और अनुशासनहीनता के चलते शंकर घोष को सदन से निलंबित कर दिया था। लेकिन घोष ने बाहर जाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद अध्यक्ष ने मार्शलों और सुरक्षाकर्मियों को उन्हें जबरन बाहर ले जाने का आदेश दिया। जैसे ही सुरक्षाकर्मियों ने कार्रवाई शुरू की, बीजेपी विधायकों ने विरोध जताया और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। इस दौरान धक्का-मुक्की में शंकर घोष का चश्मा टूट गया और उन्हें चोटें भी आईं। यह घटना विधानसभा की गरिमा पर सवाल खड़े करती है और बंगाल की सियासत में एक और विवाद जोड़ देती है।
शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर लगाया आरोप
बंगाल विधानसभा में हंगामे के बाद अब राजनीति गरमा गई है। विपक्ष के नेता और बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि टीएमसी सरकार ने उनके विधायकों के साथ बर्बरता की है और यह लोकतांत्रिक परंपराओं पर सीधा हमला है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “मार्शलों ने हमारे विधायकों के साथ दुर्व्यवहार किया। शंकर घोष को गंभीर चोटें आई हैं। यह टीएमसी की तानाशाही और विपक्ष को दबाने की मानसिकता को दर्शाता है।” उन्होंने निलंबन के फैसले को भी पूरी तरह से अनुचित बताया और विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी विधायकों की आवाज को जानबूझकर दबाने की कोशिश की जा रही है।





