back to top
24.1 C
New Delhi
Monday, March 30, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Political Kissa: गांव-गांव से खड़ी की ताकत, नंदीग्राम से उभरे सुवेंदु अधिकारी, अब ममता के किले को फतह करने का इरादा, जानिए पूरा सियासी किस्सा

नंदीग्राम आंदोलन से उभरकर बड़े नेता बने सुवेंदु अधिकारी अब ममता बनर्जी के खिलाफ आक्रामक रुख में नजर आ रहे हैं। जानिए उनका पूरा राजनीतिक सफर, बड़े फैसले और हालिया विवाद।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिनकी पहचान संघर्ष, आंदोलन और बड़े राजनीतिक फैसलों से बनी है। नंदीग्राम आंदोलन से उभरकर राज्य की राजनीति में बड़ा चेहरा बने अधिकारी ने उसी जमीन पर अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ममता बनर्जी को हराकर इतिहास रच दिया था।

नंदीग्राम से शुरू हुआ सफर

साल 2007 में Nandigram में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। उस समय सुवेंदु अधिकारी Trinamool Congress के नेता थे और आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित किया और आंदोलन को मजबूत बनाया। यही आंदोलन उनके राजनीतिक करियर की नींव बना। 2021 विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से उन्होंने सीधे Mamata Banerjee को चुनौती दी। यह मुकाबला बेहद कांटे का रहा और पूरे देश की नजरें इस सीट पर टिकी रहीं। आखिरकार सुवेंदु अधिकारी ने मामूली अंतर से जीत हासिल की। यह जीत इसलिए खास थी क्योंकि ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर यहां से चुनाव लड़ा था। एक समय सुवेंदु अधिकारी Trinamool Congress के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे, लेकिन 2020 में उन्होंने पार्टी छोड़कर BJP का दामन थाम लिया। यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन इसी के बाद वह राज्य की राजनीति में एक मजबूत विपक्षी चेहरा बनकर उभरे।

हालिया घटनाओं से बढ़ी नाराजगी

हाल के दिनों में कई घटनाओं को लेकर सुवेंदु अधिकारी ने नाराजगी जताई है। जनवरी 2026 में पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोना में उनके काफिले पर हमला हुआ, जिसके बाद उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस पर भी निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया। इसके अलावा मार्च 2026 में नंदीग्राम में मूर्ति से छेड़छाड़ की घटना पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी और राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।पहले भी कूचबिहार की घटना को लेकर उन्होंने अपनी सुरक्षा पर खतरे की बात कही थी। सुवेंदु अधिकारी को आज बागी नेता और आक्रामक विपक्षी चेहरे के रूप में देखा जाता है। विधानसभा में उनके तीखे बयान और सरकार पर हमले अक्सर सुर्खियों में रहते हैं।

जमीनी नेता की पहचान

उनका राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ है। नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उन्होंने सीधे जनता के बीच रहकर काम किया, जिससे उनकी मजबूत पकड़ बनी। यही वजह है कि उन्हें आज भी एक “ग्रासरूट लीडर” माना जाता है। नंदीग्राम से शुरू हुआ Suvendu Adhikari का सफर उन्हें पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में ले आया। जहां एक ओर उन्होंने बड़े राजनीतिक दांव खेलकर अपनी पहचान बनाई, वहीं दूसरी ओर मौजूदा घटनाओं को लेकर उनकी नाराजगी यह दिखाती है कि राज्य की राजनीति में टकराव और सियासी गर्मी अभी भी बरकरार है।

Advertisementspot_img

Also Read:

Bengal Election: Balrampur Seat पर 2026 में कांटे की टक्कर के आसार, 2016 और 2021 के नतीजों ने बढ़ाई सियासी हलचल

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल की बलरामपुर विधानसभा सीट (Balrampur Seat) राज्य की उन सीटों में गिनी जाती है, जहां चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प...
spot_img

Latest Stories

⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵