नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रवासी मजदूरों के लिए एक बड़ी घोषणा करते हुए ‘श्रमश्री योजना’ का ऐलान किया है। इस योजना के तहत जो प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों से वापस बंगाल लौटना चाहते हैं, उन्हें सरकार हर महीने 5000 की आर्थिक सहायता देगी वह भी पूरे 12 महीने तक।
मुख्यमंत्री ममता ने मंगलवार को राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमारे राज्य के करीब 22 लाख प्रवासी मजदूर देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे हैं। लेकिन बीजेपी शासित राज्यों में इन्हें भाषा के नाम पर, पहचान के नाम पर परेशान किया जा रहा है। यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि बहुत सारे मजदूरों ने बंगाल लौटने की इच्छा जताई है, लेकिन रोज़गार की चिंता उन्हें रोक रही है। अब श्रमश्री योजना के ज़रिए सरकार उन्हें आर्थिक सहारा देगी ताकि वे अपनी ज़िंदगी दोबारा शुरू कर सकें।
केवल बंगाली प्रवासी मजदूर होंगे योजना के पात्र
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि यह योजना सिर्फ बंगाल से बाहर गए बंगाली प्रवासी मजदूरों के लिए है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में सिर्फ बंगाली बोलने की वजह से इन मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है। कई मामलों में उन्हें अपराधी तक करार दे दिया गया।
ममता बनर्जी ने कहा, “यह किसी भी इंसान के मौलिक अधिकारों का हनन है। सिर्फ भाषा की वजह से किसी को प्रताड़ित करना अस्वीकार्य है। हम अपने लोगों को सुरक्षा, सम्मान और रोज़गार देना चाहते हैं।”
श्रम विभाग करेगा योजना का संचालन
श्रमश्री योजना को राज्य के श्रम विभाग के तहत लागू किया जाएगा। जिन मजदूरों को अभी तक काम नहीं मिला है, वे इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे और पूरे एक साल तक ₹5000 प्रति माह की मदद पा सकेंगे — जब तक उन्हें कोई नया रोज़गार नहीं मिल जाता।
एक नजर में समझें श्रमश्री योजना
लाभार्थी: बंगाल के प्रवासी मजदूर जो अन्य राज्यों से वापस लौटेंगे।
सहायता राशि: 5000 प्रति माह
समयावधि: अधिकतम 12 महीने या जब तक रोज़गार नहीं मिलता।
लागू करने वाली संस्था: पश्चिम बंगाल सरकार का श्रम विभाग।
घोषणा: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, नबन्ना प्रेस कॉन्फ्रेंस।
ममता सरकार की इस घोषणा को राज्य में एक मानव-केंद्रित और पुनर्वास परक कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में योजना की विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की जाएगी।





