नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। वह राज्य में चुनाव आयोग की ओर से चल रही मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ दायर याचिकाओं पर हो रही अहम सुनवाई में शामिल हुईं। ममता बनर्जी ने अदालत से खुद अपनी बात रखने की अनुमति मांगी।
”मैं बंगाल की जमीनी हकीकत जानती हूं”
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने कहा, “मैं बंगाल की मुख्यमंत्री हूं और वहां की परिस्थितियों को अच्छी तरह समझती हूं। आप सभी जजों का सम्मान करती हूं। यह मेरी निजी लड़ाई नहीं, बल्कि बंगाल के आम लोगों की लड़ाई है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर वह पहले ही चुनाव आयोग को कई पत्र लिख चुकी हैं।
CJI ने दिया बोलने का समय
CJI ने ममता बनर्जी से कहा कि उनके पास कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ वकील मौजूद हैं, जो उनकी ओर से पक्ष रख सकते हैं। इस पर ममता ने अनुरोध किया कि उन्हें कुछ मिनट बोलने दिया जाए। इसके बाद CJI ने उन्हें 15 मिनट का समय दिया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं को भी ‘नेम मिसमैच’ बताकर वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। उनका दावा था कि बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। सीएम ममता ने कहा कि इस प्रक्रिया के चलते कई बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ बीएलओ की जान गई है और कुछ ने आत्महत्या तक कर ली है, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
चुनाव आयोग की दलील
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वरों की नियुक्ति नियमों के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब एक करोड़ लोगों की सुनवाई हो चुकी है और बाकी की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। उनका कहना था कि जब राज्य सरकार सहयोग नहीं करती, तब ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं। ममता बनर्जी ने माइक्रो ऑब्जर्वरों की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। हालांकि चुनाव आयोग ने इस आरोप को खारिज कर दिया। सुनवाई के अंत में CJI ने कहा कि आधार समेत अन्य मुद्दों पर फैसला फिलहाल सुरक्षित रखा गया है। अदालत ने चुनाव आयोग को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए एक दिन का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 9 फरवरी 2026 को तय की।





