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Monday, March 2, 2026
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कौन हैं I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन? जानिए क्या काम करती है कंपनी और राजनीति में कितनी है उनकी पकड़

ED ने गुरुवार को कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के दफ्तर पर छापेमारी की। इस कार्रवाई ने तब और ज्यादा सुर्खियां बटोरीं जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अचानक मौके पर पहुंच गईं।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के दफ्तर पर छापेमारी की। इस कार्रवाई ने तब और ज्यादा सुर्खियां बटोरीं जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अचानक मौके पर पहुंच गईं। ईडी की इस रेड के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

क्या है I-PAC?

I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जो राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति, प्रचार योजना और प्रशासनिक सलाह का काम करती है। इस कंपनी की स्थापना 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने की थी। I-PAC ने देश के कई बड़े नेताओं और पार्टियों के लिए काम यादगार अभियान चलाए हैं। 2019 के बाद से यह तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ काम कर रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल की बड़ी जीत में I-PAC की रणनीति को अहम माना गया था।

कौन हैं प्रतीक जैन?

प्रतीक जैन I-PAC के डायरेक्टर और सह-संस्थापक हैं। वह बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं और उन्होंने IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। I-PAC से जुड़ने से पहले वह डेलॉएट इंडिया में एनालिस्ट के तौर पर काम कर चुके हैं।

प्रशांत किशोर के 2021 में I-PAC छोड़ने के बाद प्रतीक जैन, ऋषिराज सिंह और विनेश चंदेल कंपनी के प्रमुख डायरेक्टर बने।

राजनीति में कितनी पकड़ है प्रतीक जैन की?

प्रतीक जैन आमतौर पर लो-प्रोफाइल रहते हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक पकड़ मजबूत मानी जाती है। वह कई बार पश्चिम बंगाल सचिवालय नबन्ना जा चुके हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात कर चुके हैं। उनकी टीम तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में रहती है।

डेटा और SIR को लेकर ममता की चिंता

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एक तरफ SIR के नाम पर मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ पार्टी से जुड़ा संवेदनशील डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया और कहा कि पार्टी ने पहले ही जरूरी डेटा सुरक्षित जगहों पर रख दिया है। I-PAC पर ईडी की रेड और ममता बनर्जी की सीधी दखल के बाद यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव को और तेज कर सकता है। फिलहाल सभी की नजरें ईडी की अगली कार्रवाई और आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं।

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