नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक और बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। कबीर ने साफ कहा है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी के सामने सीधी चुनौती पेश करेंगे। साथ ही दावा किया कि 2026 में न तो टीएमसी और न ही बीजेपी सत्ता की दहलीज तक पहुंच पाएगी।
22 दिसंबर को नई पार्टी, 135 सीटों पर लड़ने का ऐलान
ANI से बातचीत में हुमायूं कबीर ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को वह अपनी नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा करेंगे और राज्य में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे। उनका दावा है कि आगामी चुनाव में उनकी पार्टी इतनी सीटें जीत लेगी कि सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को उनके समर्थन की जरूरत पड़ेगी। कबीर ने कहा-चुनाव के बाद मैं किंगमेकर रहूंगा। मेरे समर्थन के बिना कोई भी दल सरकार नहीं बना सकेगा।
ममता 2026 में CM नहीं बन पाएंगी – कबीर ने दोहराया दावा
हुमायूं कबीर ने एक बार फिर अपना विवादित बयान दोहराते हुए कहा कि ममता बनर्जी 2026 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगी। उन्होंने पहले भी इसी तरह का दावा किया था, लेकिन इस बार उन्होंने सीटों के आंकड़ों के साथ अपनी बात को और पुख्ता करने की कोशिश की है। पीटीआई भाषा के मुताबिक, कबीर का कहना है कि आगामी चुनाव में न टीएमसी और न ही बीजेपी—किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलेगा। 294 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी दल 148 सीटों का जादुई आंकड़ा पार नहीं कर सकेगा, क्योंकि जनता बदलाव का मन बना चुकी है। कबीर का कहना है कि उनकी नई पार्टी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगी और वे स्वयं “किंगमेकर” की भूमिका में उभरेंगे। उन्होंने यहां तक दावा कर दिया कि अगला मुख्यमंत्री उनकी पार्टी के समर्थन के बिना शपथ ही नहीं ले पाएगा, क्योंकि सत्ता की चाबी अब उनके हाथ में रहने वाली है।
TMC का करारा पलटवार-कबीर के दावों को बताया निराधार
हुमायूं कबीर के बड़े-बड़े दावों और अगले चुनाव में किंगमेकर बनने के इरादों पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कड़ा पलटवार किया है। पार्टी के प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने अपने बयान में तंज कसते हुए कहा कि, “हुमायूं कबीर दिवास्वप्न देख रहे हैं। पहले अपनी जमानत बचा लें, फिर किंगमेकर बनने की बातें करें। उनके ये बयान उनकी राजनीतिक हताशा को ही उजागर करते हैं। टीएमसी का कहना है कि कबीर के पास कोई वास्तविक जनाधार नहीं है और ऐसे विवादित बयान केवल सुर्खियाँ बटोरने और मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए दिए जा रहे हैं। पार्टी के अनुसार, पश्चिम बंगाल की जनता अपने निर्णयों में समर्थ और साक्षर है, और किसी भी दावे को सत्ता में बदलने की संभावना बेहद कम है। टीएमसी ने यह भी इशारा किया कि कबीर का यह प्रकार राजनीतिक शोभा नहीं देता और केवल वैचारिक हलचल पैदा करता है।
बंगाल की राजनीति में नई जंग की शुरुआत
हुमायूं कबीर के दावे और नई पार्टी की घोषणा ने बंगाल की सियासत में नया ताप ला दिया है। एक तरफ टीएमसी उनके बयानों को तवज्जो नहीं दे रही, वहीं कबीर खुद को अगला किंगमेकर बता रहे हैं। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 22 दिसंबर को कबीर कौन-सी नई पार्टी लॉन्च करेंगे और क्या वे वास्तव में बंगाल की राजनीति में नई शक्ति बनकर उभर पाएंगे, या फिर टीएमसी का अनुमान सही साबित होगा।





