नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव जैसे‑जैसे करीब आ रहे हैं वैस-वैसे राज्य की राजनीति में बयानबाजी और टकराव तेज होता जा रहा है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने‑सामने हैं। इसी बीच हावड़ा जिले के बागनान से टीएमसी विधायक अरुणाभ सेन के एक कथित बयान ने राज्य की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है।
BJP और TMC के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है
अरुणाभ सेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर बेहद आपत्तिजनक और हिंसक भाषा का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो में विधायक कथित तौर पर कहते हैं कि 2026 में वह पहले भाजपा नेताओं की पिटाई करेंगे और फिर उन्हें जिंदा दफना देंगे। इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा और टीएमसी के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।
”कानून‑व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है”
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर करते हुए टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनावी हार के डर से टीएमसी के नेता खुलेआम हिंसा और धमकी की राजनीति पर उतर आए हैं। भाजपा का आरोप है कि राज्य में राज्य प्रायोजित हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है और कानून‑व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
अरुणाभ सेन-इस मामले में किसी की नहीं सुनेंगे
विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। अरुणाभ सेन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने हिंदी भाषी नेताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि अगर बिहार, उत्तर प्रदेश या ओडिशा से जुड़े नेता बंगाल में आकर बैठक करेंगे, तो वह उनके खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे और स्थानीय नेताओं के घर गिरा देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह बदला लेने में विश्वास रखते हैं और इस मामले में किसी की नहीं सुनेंगे, चाहे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही क्यों न मना करें।
भाजपा नेताओं ने कहा-धमकी से डरने वाले नहीं हैं
अरुणाभ सेन के बयान के बाद बागनान और आसपास के इलाकों में राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है। भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा है कि वे किसी भी तरह की धमकी से डरने वाले नहीं हैं और कानूनी रास्ते से इसका जवाब दिया जाएगा। भाजपा का कहना है कि ऐसे बयान लोकतंत्र और कानून‑व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक हैं।
टीएमसी और केंद्र सरकार के बीच टकराव
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर भी सियासी पारा चढ़ा हुआ है। I‑PAC कार्यालय और इससे जुड़े लोगों पर छापेमारी के बाद टीएमसी और केंद्र सरकार के बीच टकराव और गहरा गया है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि ईडी का दावा है कि वह भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच कर रही है।
”BJP सत्ता में आई तो भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को जेल भेजा जाएगा”
वहीं विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी भी सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने जुलूस निकालकर कहा कि 2026 का विधानसभा चुनाव भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के खिलाफ होगा। उनका दावा है कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को जेल भेजा जाएगा। कुल मिलाकर, अरुणाभ सेन के विवादित बयान, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और नेताओं की तीखी बयानबाजी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और ज्यादा गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।





