नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव मुहाने पर हैं जिससे पहले पश्चिम बर्धमान जिले के तहत आने वाली Asansol Uttar Seat एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई है। इस सीट को राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। यह आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है।
आसनसोल विधानसभा में हिंदी भाषी लोगों का प्रभुत्व है। यहां यूपी, बिहार, झारखंड से बड़ी संख्या में आकर लोग रहते हैं। हालांकि साल 1951 में इसका बंटवारा हो गया था जिसके बाद यह सीट असतित्व में आई। आसनसोल पर 1951 से 2006 के बीच, ज्यादातर लेफ्ट पार्टियों का दबदबा रहा, जिन्होंने इसे 14 में से नौ बार जीता, कांग्रेस ने चार बार और तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी की शुरुआत के तुरंत बाद 2001 में अपनी पहली जीत हासिल की।
साल 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में किसने लहराया परचम
साल 2016 में इस सीट पर TMC और BJP के बीच आमने सामने की टक्कर हुई थी जिसमें टीएमसी ने बाजी मार ली। टीएमसी के मोलोय घटक ने बीजेपी के निर्मल कर्माकर को 23,897 वोटों से हरा दिया था। दूसरे नंबर पर रहे बीजेपी के उम्मीदवार को 60,818 वोट मिले थे जबकि TMC के मोलोय घटक ने 84,715 वोट के साथ जीत का परचम लहराया। इसके बाद बीजेपी को 2021 के विधानसभा चुनाव में उलटफेर की उम्मीद थी लेकिन परिणाम नहीं बदला। मोलोय घटक ने बीजेपी उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी को 21110 वोटों से हराया था।
ऐसे रहे हैं Asansol Uttar Seat पर चुनावी परिणाम
2021: मोलोय घटक (TMC)
2016: मोलोय घटक (TMC)
2011: मोलोय घटक (TMC)
2006: प्रतिभा रंजन मुखर्जी (CPI)
2001: कल्याण बनर्जी (TMC)
1996: तापस बनर्जी (कांग्रेस)
1991: गौतम रॉय चौधरी (CPI)
1987: प्रबुद्ध लाहा (कांग्रेस)
1982: बिजय पाल (CPI)
1977: हरधन रॉय (CPI)
1972: निरंजन दिहिदार (CPI)
1971: लोकेश घोष (CPI)
1969: लोकेश घोष (CPI)
1967: गोपिका रंजन मित्रा (कांग्रेस)
1962: बिजय पाल (CPI)
1957: शिबदास घटक (कांग्रेस)
1952: अतींद्र नाथ बोस (फॉरवर्ड ब्लॉक)




