नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। यह फैसला आम जनता के लिए राहत की खबर है और इससे मध्यम वर्ग को काफी फायदा होगा।
क्या है नई टैक्स व्यवस्था?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब 12 लाख की सालाना कमाई पर कोई भी टैक्स देने की आवश्यकता नहीं है। यह बदलाव न्यू टैक्स व्यवस्था के तहत हुआ है। इससे पहले 7 लाख की कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होता था। स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये ही रखा गया है। इसके साथ ही नए इनकम टैक्स बिल का ऐलान भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया। उन्होंने कहा न्यू इनकम टैक्स बिल अगले हफ्ते लाया जाएगा।
नए टैक्स स्लैब के अनुसार
0 से 12 लाख रुपये तक कोई इनकम टैक्स नहीं, 12 लाख रुपये से ऊपर पुरानी दरों के अनुसार टैक्स लागू रहेगा
पहले टैक्स स्लैब कैसे थे?
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद इनकम टैक्स में कुछ बदलाव किए गए थे।
2.5 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं था।
2.5 से 5 लाख रुपये तक की आय पर 10% टैक्स।
5 से 10 लाख रुपये तक की आय पर 20% टैक्स।
2018-19: स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर
सरकार ने इस दौरान स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर को बढ़ाकर 4% कर दिया, जिससे उच्च आय वर्ग पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
2020-21: कोविड-19 के असर में बदलाव
कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने कुछ टैक्स में राहत दी, लेकिन उच्च आय वालों के लिए टैक्स दरें स्थिर रहीं।
2021-22: स्थिरता बनाए रखने की कोशिश
इस साल टैक्स दरों में ज्यादा बदलाव नहीं किए गए।अभी तक का टैक्स स्लैब (2024-25 से पहले) 0 से 3 लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं 3 से 7 लाख रुपये तक: 5% टैक्स 7 से 10 लाख रुपये तक: 10% टैक्स10 से 12 लाख रुपये तक: 15% टैक्स लेकिन अब इन सभी स्लैब्स को हटाकर सीधे 12 लाख तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया गया है।
लेकिन अब इन सभी स्लैब्स को हटाकर सीधे 12 लाख तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया गया है।
इस फैसले का असर
मध्यम वर्ग को बड़ी राहत इससे खासकर नौकरी पेशा और मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा फायदा होगा। लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा, जिससे बाजार में खर्च बढ़ेगा और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार के राजस्व पर असर टैक्स में छूट से सरकार के टैक्स कलेक्शन पर असर पड़ सकता है, लेकिन बढ़ी हुई खपत इसे संतुलित कर सकती है। वित्त मंत्री की यह घोषणा देश के लाखों टैक्सपेयर्स के लिए राहत की खबर है। इससे न केवल लोगों की बचत बढ़ेगी बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।





