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Monday, March 2, 2026
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स्विट्ज़रलैंड का सपना अब हुआ सस्ता, घूम आएं हिमाचल के ‘मिनी स्विट्ज़रलैंड’ खज्जियार

खज्जियार, हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत घाटी, जिसे स्विस चांसलर ने 'मिनी स्विट्ज़रलैंड' कहा था, प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए मशहूर है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अगर स्विट्ज़रलैंड की बर्फीली चोटियों और हरियाली से भरे वादियों को देखने का आपका सपना है, लेकिन बजट या लंबी यात्रा की वजह से टल रहा है, तो चिंता छोड़िए। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित खज्जियार घाटी आपकी ये तमन्ना पूरी कर सकती है। इसे भारत का ‘मिनी स्विट्ज़रलैंड’ कहा जाता है, जहां की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को स्विट्ज़रलैंड जैसी अनुभूति कराती है।

खज्जियार की खूबसूरती को पहली बार अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली, जब जुलाई 1992 में स्विट्ज़रलैंड के चांसलर विली ब्लेज़र ने इस घाटी का दौरा किया। उन्होंने यहां की हरी-भरी घाटियों, देवदार के जंगलों और शांत झील को देखकर इसे ‘मिनी स्विट्ज़रलैंड’ का नाम दिया था। इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने खज्जियार से स्विट्ज़रलैंड के बर्न शहर तक की दूरी बताने वाला एक साइनबोर्ड यहां लगवाया और इस घाटी का एक पत्थर स्विस संसद में भी भेजा।

प्राकृतिक छटा और रोमांच

समुद्र तल से करीब 2000 मीटर की ऊंचाई पर बसा खज्जियार प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम उदाहरण है। घने देवदार के जंगल, हरे-भरे मैदान और बीचों-बीच बसी खज्जियार झील पर्यटकों के दिलों को मोह लेती है। खासकर सुबह के समय जब धुंध के बीच धौलाधार पर्वत श्रृंखला दिखाई देती है, तो दृश्य बेहद मनमोहक होता है।

धार्मिक विरासत भी है समृद्ध

खज्जियार केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन धार्मिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। यहां झील के पास स्थित खज्जियार नाग मंदिर 12वीं सदी का प्राचीन मंदिर है, जिसे चंबा के राजा प्रीति सिंह ने बनवाया था। मंदिर में नाग देवता और भगवान शिव की मूर्तियां हैं, साथ ही पांडव और कौरवों की पत्थर नक्काशी भी दर्शनीय है। इसके अतिरिक्त, जगदम्बा मंदिर परिसर में भगवान शिव की 85 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित है, जो आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।

एडवेंचर और प्रकृति का संगम

खज्जियार में पर्यटक न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं, बल्कि यहां कई रोमांचक गतिविधियां भी उपलब्ध हैं।

कालाटोप वन्यजीव अभयारण्य: खज्जियार से 16 किमी दूर फैला यह अभयारण्य हिमालयी भालू, तेंदुआ और उड़ने वाली गिलहरी जैसी वन्यजीव प्रजातियों का घर है। ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह क्षेत्र खास आकर्षण का केंद्र है।

डैनकुंड चोटी: डलहौजी की सबसे ऊंची चोटी, 2,755 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, जो अपनी ठंडी हवा के संगीत जैसे स्वर से प्रसिद्ध है। एडवेंचर स्पोर्ट्स: पैराग्लाइडिंग, ज़ोर्बिंग, घुड़सवारी और ट्रैकिंग के अलावा बच्चों के लिए भी विशेष ट्रैकिंग पथ बनाए गए हैं।

घूमने का सही मौसम

खज्जियार की ठंडी सर्दियां स्विट्ज़रलैंड की याद दिलाती हैं, लेकिन अगर आप साफ़ आसमान और मौसम का आनंद लेना चाहते हैं, तो अप्रैल से जून तक का समय सबसे उपयुक्त है। वहीं सितंबर से नवंबर के बीच घाटी हरी-भरी और ठंडी हो जाती है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए बेस्ट टाइम माना जाता है।

तो इस बार स्विट्ज़रलैंड जाने की जगह, बजट में हिमाचल के खज्जियार की जादुई वादियों में खो जाइए और प्रकृति की अद्भुत छटा का आनंद लीजिए।

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