नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। सूरजकुंड मेला हस्तशिल्प मेलों में से एक गिना जाता है। यहां पर हरियाणा और फरीदाबाद जिले में रहने वाले लोग मेले में खूब इंजॉय करते हैं। लोग दूर-दूर से सूरजकुंड के मेले में आते हैं। भारत में लगने वाला सूरजकुंड का मेला हस्तशिल्प, हथकरघा और सांस्कृतिक धरोहर को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इस मेले में शिल्पकारों कलाकारों और हथकरघा बुनकरों को एक बड़ा मंच मिलता है जहां वह अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। वह अपने द्वारा बनाए गए चीजों को सीधे तौर पर ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं।
क्या है सूरजकुंड का इतिहास
सूरजकुंड का अर्थ ‘सूरज का तालाब’ है। इस जगह का इतिहास दसवीं शताब्दी में तोमर राजा सूरजपाल के शासनकाल से चला आ रहा है। राजा सूरजपाल सूर्य के उपासक थे जिन्होंने सूरजकुंड का निर्माण किया था और जल संचयन कराया था। इतिहास के तौर पर इस मेले का नाम सूरजकुंड मेला रखा गया।
कब से कब तक लगेगा यह मेला
सूरजकुंड का यह मेला 7 फरवरी 2025 से 23 फरवरी तक हरियाणा के फरीदाबाद जिले में आयोजित रहेगा। इस दौरान दुनिया के कोने-कोने से लोग मेले में एंजॉय करने आते हैं।
ऐसे पहुंचें सूरजकुंड
अगर आप दिल्ली से सूरजकुंड मेला जा रहे हैं तो आपको मेट्रो की वायलेट लाइन से बदरपुर तक जाना होगा। इसके बाद यहां से ऑटो लेकर आप सूरजकुंड मेले में पहुंच सकते हैं। वहीं, किसी और शहर से अगर आप आ रहे हैं तो भी दिल्ली पहुंचकर मेट्रो के रास्ते सूरजकुंड जा सकते हैं। वहीं, आप बाय रोड भी इस मेले में जा सकते हैं। प्राइवेट गाड़ी, कैब या फिर बस से सूरजकुंड आसानी से पहुंचा जा सकता है।
Surajkund Mela expenses
सूरजकुंड मेले में जाने की एंट्री फीस ₹120 है। अगर आप शनिवार या रविवार को यात्रा करते हैं तो 180 रुपए प्रति व्यक्ति है। दिल्ली से मेट्रो की टिकट ₹60 की लगेगी। इसके अलावा मेले में अगर आप कुछ खाते-पीते हैं या कुछ खरीदते हैं तो उसका खर्च अलग होगा।





