नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राजस्थान का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर जोधपुर घूमने फिरने के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा शहर माना जाता है, जहां राजाओं व महाराजाओं के शाही इतिहास और संस्कृति की छटा आपको देखनें को मिलेगी। यह शहर खासतौर पर अपने खान पान और मेहमान नवाजी के लिए जाना जाता हैं। जो थार के रेगिस्तान के बीचोंबीच बसा हुआ है। अगर आप भी राजस्थान घूमने का बना रहें प्लान तो एक बार जरुर घूमें जोधपुर के इन फेमस जगहों पर जहां आपके दिन कम पड़ जाऐगें लेकिन मन नही भरेगा।
राजस्थान की खूबसूरती और संस्कृति
अगर आप जोधपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार जरुर घूमें भारतीय राजाओं व महाराजाओं के खास स्थल,जहां उनके इतिहास व कलाओं का प्रदर्शन देखनें को मिलता है, उनमें मेहरानगढ़ किला, जसवंत थड़ा, मंडोर गार्डन और उम्मेद भवन पैलेस जैसें प्रमुख स्थल शामिल हैं। जो राजस्थान की खूबसूरती और संस्कृति को अपने आप में संजोए हुए हैं, चलिए जानते हैं इनके बारे में।
मेहरानगढ़ किला
जोधपुर के सबसे बड़े और प्रसिद्ध किलों में से एक मेहरानगढ़ किला, जिसें राव जोधा द्वारा 1459 में जोधपुर में बनवाया गया था, यह देश के सबसे बड़े किलों में से एक किला माना जाता है, जो 410 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है। इस किले को कई पहाड़ियों को काटकर बनाया गया है। जिसें विशाल दीवारों द्वारा सुरक्षित किया गया है। इस किले में सात गेट हैं जिनमें विक्ट्री गेट, फतेह गेट, भैरों गेट, डेढ़ कामग्रा गेट, मार्टी गेट और लोहा गेट शामिल हैं। इस किले में राजा की शाही पालकियां, हथियार, पोशाकें और प्राचीन कलाएं दिखाया गया है।
जसवंत थड़ा
जोधपुर में शांति का अनुभव करानेवाला जसवंत थड़ा, जिसे मारवाड़ का ताजमहल भी कहा जाता है। इसका निर्माण महाराज जसवंत सिंह के दूसरे शासक के याद में उनके बेटे महाराज सरदार सिंह जी ने सन् 1906 में करावाया था।जो कि, मेहरानगढ़ दुर्ग की तराई में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। जिसके परिसर में एक झील भी है, यहां का मंदोर उद्यान, जिसमें मंदिरों और स्मारकों का आकर्षक संयोजन है। इस शांतिपूर्ण सफेद रंग के स्मारक में जोधपुर राज्य के कई राजाओं के स्मारक स्थित है। जसवंत थड़ा को क्लॉक टावर के नाम से भी जाना जाता है। यहां एक 112 साल पुरानी घड़ी है। जिसकी कीमत लगभग 3 लाख बताई जाती है। यहां आपको शांत वातावरण और सुकून का अनुभव होगा। इसकी ऊंची चट्टानी छतें प्रमुख आकर्षण का केंद्र हैं।
मंडोर गार्डन
जोधपुर से कुछ ही मिनटों की दूरी पर बना मंडोर गार्डन, मारवाड़ की राजधानी के नाम से विख्यात इस गार्डन को माण्डयपुर, मंडोवर भौगीशेल नामों से भी जाना जाता रहा है। यहां आपको राजपूतों के इतिहास का एक संग्रह देखने को मिलेगा। जहां मंडोर का एक किस्सा भी दिलचस्प है. प्रतिहार (परिहार) शासक के राजा बाउक के खुदाई के दौरान मिले, विक्रम संवत 894 के एक शिलालेख के अनुसार, मंडोर में नागवंशी क्षत्रियों का राज्य हुआ करता था, उसके बाद परमारों और परिहारों का एक बाद एक का राज्य होता गया। यहां बहुत सारे फलदार पेड़ भी लगाये गए हैं। यह करीब 6 वीं शताब्दी से जमा की गई संरचनाएं भी हैं जिसे देखनें दूर-दूर से देशी विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है। यहां भौगीशैल परिक्रमा के अवसर पर पैदलयात्रा कर भक्त नाग गंगा के दर्शन के लिए भी यहां आते हैं।
उम्मेद भवन पैलेस
जोधपुर में फेमस महल से मशहूर उम्मेद भवन पैलेस जिसें 20वीं सदी में साल 1943 में बनवाया गया था। यह पैलेस भव्य दुर्ग , किलो सहित हवेलियों को लेकर पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है यह अपने अद्भुत वास्तुकला और शानदार नक्काशी के लिए भी जाना जाता है। जिसे देश के सबसे महंगे और सुंदर महलों में से एक है जाना जाता है। जो तीन भागों में बंटा हुआ है। जहां शाही राज बंसज आज भी यहां रहते है, इस महल में कुल 347 बड़े कमरे है, जिसमें एक बड़ा आंगन और एक बडी भोजनशाला शामिल है। जो पर्यटकों को घूमने के लिए हमेशा खुला रहता है। इसे “ताज उम्मैद भवन पैलेस जोधपुर” के नाम से भी जाना जाता है। यह दुनिया के सबसे बड़े निजी महलों में से एक जाना जाता है। जहां आप राजाओं के रहन सहन संस्कृति और उनके द्वारा उपयोग किये जाने वाले हथियारों को देख सकते हैं।




