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Thursday, March 5, 2026
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गुरुवायुर के बारे में जानकारी – Guruvayur in Hindi

गुरुवायुर (Guruvayur), केरल राज्य के त्रिशूर (Thrissur) जिले में स्थित एक शहर है जो एक हिन्दू तीर्थ स्थल के रुप में प्रसिद्ध है। यहीं पर प्रसिद्ध “गुरुवायुर श्री कृष्णा मंदिर” स्थित है जहाँ प्रतिदिन काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस स्थान की प्रसिद्धि इतनी है कि इसे दक्षिण भारत का द्वारका (Dwarka of South India) कहा जाता है। गुरुवायुर मंदिर के अतिरिक्त इस जगह पर मम्मियूर महादेव मंदिर (Mammiyur Mahadeva Temple), वेंकटचलपति मंदिर (Venkitachalapathy Temple), एलीफैंट कैंप अभयरण्य (Elephant Camp Sancutary) ,चोवल्लूर शिवा मंदिर (Chowalloor Shiva Temple), पलायुर चर्च (Palayur Church) आदि दर्शनीय स्थल हैं। 

गुरुवायुर के बारे मे –

गुरुवायुर (Guruvayur) में एक धार्मिक नगर है। यहां खरीदारी के लिए पूजा-पाठ से संबंधित दुकाने अधिक हैं। इनमें से अधिकतर दुकानें श्री कृष्णा मंदिर के आस-पास हैं। यहाँ से पर्यटक पूजा का सामान, भगवान की मूर्तियां, कपड़े, प्राचीन वस्तुएं, खिलौने आदि चीजें खरीद सकते हैं। इसके अलावा यहाँ बहुत से दुकानों पर पेंटिंग, हैंडीक्राफ्ट्स के सामान के साथ केरल के स्थानीय कपड़े और ज्वैलरी भी बेचे जाते हैं।

गुरुवायुर की यात्रा सुविधाएं –

यात्रा के दौरान अपनी चीजों का विशेष ध्यान रखें

भीड़- भाड़ वाले इलाके में कीमती सामान लेकर न जाएँ

एक तीर्थस्थल होने के कारण यहाँ मांसाहारी भोजन मिलना थोड़ा मुश्किल है

यहां स्थित श्री कृष्ण मंदिर और अन्य मंदिरों में अवश्य जाएं

यहां स्थित मंदिरों में घूमते समय रिति-रिवाजों और आदेशों का अवश्य पालन करें

गुरुवायुर का इतिहास –

गुरुवायुर के इतिहास की बात की जाए तो इससे संबंधित कोई भी ऐतिहासिक तथ्य उपलब्ध नही हैं। 14वीं शताब्दी के तमिल साहित्य ‘कोकसंदेसम’ (Kokasandesam) में कुरुवायुर “Kuruvayur” नामक एक जगह का वर्णन अवश्य है जो “गुरुवायुर” शब्द से काफी मिलता-जुलता है। 16वीं शताब्दी तक कुरुवायुर “Kuruvayur” के बारे में बहुत से प्रसंग (References) देखे गए। प्राचीन द्रविडिक (Dravidic) भाषा के अनुसार कुरवाई (Kuruvai) का अर्थ समुद्र होता है इसलिए तट पर स्थित गांव को कुरुवायुर “Kuruvayur” कहा गया।

गुरुवायुर की सामान्य जानकारी –

राज्य– केरल 

स्थानीय भाषाएँ– मलयालम, अंग्रजी और हिन्दी

स्थानीय परिवहन– टैक्सी, कैब, ऑटो रिक्शा और बस

पहनावा–  यहाँ की महिलाएं नैरयथू (Neriathu/Neriyathu) नामक एक पारंपरिक साड़ी पहनती हैं। इसके अलावा यहाँ महिलाएं विशेष रूप से साड़ी ही पहनती हैं। उत्सव या किसी फंक्शन के मौके पर कारा (Kara) नामक ज्वैलरी पहनी जाती है। यहाँ के स्थानीय पुरुष मुंडू (Mundu) पहनते है जो लुंगी (Lungi) जैसी होती है। साथ ही शहर में रहने वाले युवा पुरुष जींस, टी-शर्ट, पैंट शर्ट भी पहनते हैं। यहाँ स्थित कृष्णा मंदिर में प्रवेश करने के लिए एक अलग ड्रेस कोड है। जिसके अनुसार पुरुषों को वेष्टि (Veshti) एक तरह की लुंगी के साथ थुंडू (Thundu) पहनना होता है। जबकि महिलाओं को साड़ी पहननी होती है। 

खान-पान– यहाँ पर व्यंजनों में शुद्ध शाकाहारी भोजन अधिक प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित कृष्णा मंदिर के आस-पास कई रेस्तरां हैं जहाँ पर्यटक विभिन्न प्रकार के शुद्ध शाकाहारी व्यंजनों का लाजवाब स्वाद चख सकते हैं। शहर के अधिकतर रेस्तरां में साउथ इंडियन व्यंजन ही परोसा जाता है।

गुरुवायुर कैसे पहुंचें –

  • हवाई मार्ग – By Flight

कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Cochin International Airport) गुरुवायुर का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। यहाँ से गुरुवायुर की दूरी लगभग 80 किमी है। इसके अलावा पर्यटक यहां कालीकट इंटरनेशल एयरपोर्ट (Calicut International Airport) से भी पहुंच सकते हैं जो करीब 82 किमी. दूर है। दोनों ही एयरपोर्ट देश के विभिन्न शहरों से हवाई मार्ग द्वारा जुड़े हुए हैं। 

  • रेल मार्ग – By Train

गुरुवायुर रेलवे स्टेशन (Guruvayur Railway Station) एक छोटा रेलवे स्टेशन है जहाँ कुछ ट्रेने ही रुकती हैं। केरल के विभिन्न शहरों से इस स्टेशन के लोकल ट्रेन मिलती हैं। इसके अलावा यहाँ का नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन त्रिशूर (Thrissur Railway Station) है जो गुरुवायुर से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर है। 

  • सड़क मार्ग – By Road

गुरुवायुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 17 से सड़क मार्ग द्वारा देश के विभिन्न शहरों से जुड़ा हुआ है। केरल के कई शहरों से गुरुवायुर के लिए बसें चलती हैं। 

गुरुवायुर घूमने का समय –

दिसंबर से फरवरी के बीच का माह यहाँ घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इन दिनों मौसम हल्का ठंडा होता है और पर्यटन के लिहाज से यह समय सही माना जाता है। गर्मियों के दिनों में यहां काफी गर्मी होती है जिस वजह से यह समय पर्यटन के अनुकूल नहीं माना जाता है।

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