नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बाबा बर्फानी के नाम से प्रसिद्ध भोलेनाथ का शिवलिंग जो हिमालय में स्थित अमरनाथ की गुफा में मौजूद है। जिन्हें अमरनाथ की गुफा बाबा बर्फानी के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि अमरनाथ यात्रा करने से मनुष्य के जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष प्राप्त होता है। हर साल जून से अगस्त तक के महीने में होनेवाली इस यात्रा को लोग हिमालय में स्थित पवित्र गुफा मंदिर की कठिन तीर्थ यात्रा करते हैं। आइए जानते है कब से शुरु होगी बाबा बर्फानी की अमरनाथ यात्रा ।
जाने कब-से शुरू होगी अमरनाथ यात्रा
जल्द ही शिवभक्त को अमरेश्वर नाम से मशहूर अमरनाथ गुफा में बनने वाले बाबा बर्फानी के दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त होगा। अमरनाथ यात्रा कठिन होने के साथ-साथ बेहद पुण्यकारी भी मानी जाती है। जाने कब-से शुरू होगी यात्रा, हर साल अमरनाथ यात्रा की तारीख का ऐलान करनेवाली अमरनाथ श्राइन बोर्ड की बैठक द्वारा इस यात्रा की तारीख को तय किया जाता है जो इस साल श्री अमरनाथ की पावन यात्रा 3 जुलाई 2025से शुरू होने जा रही है। जो 09 अगस्त 2025 को संपन्न होगी। जिसकी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 मार्च से शुरू हो चुकी है। इस बार यह तीर्थयात्रा 37 दिनों तक चलने वाली है।
अमरनाथ यात्रा का महत्व
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, इसी पवित्र गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई थी। जिसका ये महत्व है कि, जो भी भक्त सच्चे मन से अमरनाथ की यात्रा कर बाबा बर्फानी के दर्शन करता है, उसके सभी पाप नष्ट होकर मोक्ष को प्राप्ति होती है। इस तीर्थ स्थल की यात्रा से व्यक्ति को 23 तीर्थों के दर्शन करने जितना पुण्य प्राप्त होता है।
जहां स्वयंभू शिवलिंग की ऊंचाई चंद्रमा के चरणों के आधार पर घटती और बढ़ती रहती हैं। चूंकि, अमरनाथ की यात्रा का आरंभ आषाढ़ पूर्णिमा से शुरु होकर पूरे सावन चलती है। इसलिए श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षा बंधन के दिन संपन्न होती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव सर्वप्रथम इस गुफा में श्रावण पूर्णिमा के दिन ही आए थे, इसलिए इस दिन इस गुफा के दर्शन का विशेष महत्व माना गया है। यही कारण है कि श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन गुफा में छड़ी मुबारक को शिवलिंग के पास स्थापित कर दिया जाता है।
क्या है “छड़ी मुबारक”
अमरनाथ यात्रा की एक धार्मिक परंपरा है “छड़ी मुबारक” यानी भगवान शिव से संबंधित मानी गई पवित्र गदा या छड़ी को अमरनाथ गुफा में ले जाया जाता है, , जो यात्रा के समापन का प्रतीक माना जाता है। इसदिन से इस यात्रा का समापन कर आम दर्शनार्थी के लिए बंद कर दिया जाता है यहां बर्फ से बने शिवलिंग जो ऊचें पर्वत से टपक रहे बूंद-बूंद पानी से बड़े शिवलिंग का आकार ले लेते है । इसलिए इन्हें बाबा बर्फानी भी कहा जाता है।





