नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देशभर में दीपावली का पर्व उल्लास, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि रावण का वध कर और 14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान श्रीराम जब अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपों का यह पर्व हर वर्ष अमावस्या की रात को मनाया जाता है। इस दिन लोग घरों को सजाते हैं, माता लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं और प्रभु श्रीराम के मंदिरों में दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
अगर आप भी इस दिवाली प्रभु श्रीराम की भक्ति में डूबना चाहते हैं, तो देशभर के इन प्रसिद्ध राम मंदिरों का दर्शन अवश्य करें, जिनकी महिमा और ऐतिहासिक महत्व भक्तों के दिलों में गहराई तक बसे हैं।
अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (उत्तर प्रदेश)
अयोध्या की दीपावली पूरे देश में सबसे प्रसिद्ध मानी जाती है। यही वह पवित्र भूमि है, जहां भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था और वनवास के बाद लौटने पर पहली बार दीपावली मनाई गई थी। हर वर्ष यहां दीपोत्सव के मौके पर पूरी अयोध्या नगरी दीपों की जगमग रोशनी से नहा उठती है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस दिन दर्शन के लिए लाखों भक्त उमड़ते हैं। कहा जाता है कि यहां दीप जलाने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
कलाराम मंदिर, पंचवटी (नासिक, महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र के नासिक के पंचवटी क्षेत्र में स्थित कलाराम मंदिर भी भगवान श्रीराम की वनवास यात्रा से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार, सरदार रंगाराव ओधेकर को स्वप्न में गोदावरी नदी से भगवान राम की एक काली मूर्ति निकालने का संकेत मिला। बाद में जब वह मूर्ति नदी से निकाली गई, तो उसे मंदिर में स्थापित किया गया और इसीलिए इसका नाम पड़ा ‘कलाराम मंदिर’। दिवाली के मौके पर यहां विशेष आरती और दीपदान का आयोजन किया जाता है।
राम राजा मंदिर, ओरछा (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के ओरछा स्थित राम राजा मंदिर देश का एकमात्र मंदिर है, जहां भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है। यहां प्रतिदिन गार्ड ऑफ ऑनर और शस्त्र सलामी दी जाती है। कथा है कि इस मंदिर की मूर्ति को किसी और स्थान पर ले जाया जाना था, लेकिन जब मूर्ति यहां रखी गई तो वह वहीं स्थिर हो गई। दिवाली के अवसर पर इस मंदिर में विशेष पूजा, आरती और रोशनी का आयोजन किया जाता है।
रामस्वामी मंदिर, कुंभकोणम (तमिलनाडु)
दक्षिण भारत के कुंभकोणम में स्थित रामस्वामी मंदिर को ‘दक्षिण भारत की अयोध्या’ कहा जाता है। यहां भगवान श्रीराम के साथ माता सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की मूर्तियां एक साथ स्थापित हैं। मंदिर की दीवारों पर रामायण के प्रसंगों को सुंदर चित्रों के रूप में दर्शाया गया है। दीपावली पर यहां भव्य दीप सज्जा होती है और पूरे परिसर में भक्ति संगीत की गूंज रहती है।
त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर, त्रिस्सूर (केरल)
केरल के त्रिस्सूर जिले में स्थित त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने की थी। यहां भगवान राम के साथ उनके भाइयों और हनुमान जी की उपस्थिति मानी जाती है। दिवाली के अवसर पर यह मंदिर दीपों और पुष्पों से सजा होता है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर, त्रिस्सूर (केरल)
केरल के त्रिस्सूर जिले में स्थित त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने की थी। यहां भगवान राम के साथ उनके भाइयों और हनुमान जी की उपस्थिति मानी जाती है। दिवाली के अवसर पर यह मंदिर दीपों और पुष्पों से सजा होता है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
राम भक्ति में रौशन होती है दीपावली
अयोध्या से लेकर दक्षिण भारत तक, हर मंदिर में दीपावली का उत्सव भक्ति, आस्था और एकता का संदेश देता है। लाखों दीपों से जगमगाते मंदिर, राम नाम के जयघोष और श्रद्धालुओं की उमंग इस पर्व को और विशेष बना देती है।
इस बार की दिवाली पर अगर आप भी अपने जीवन में उजाला और शांति चाहते हैं, तो प्रभु श्रीराम के इन पवित्र मंदिरों में जाकर दीप जलाएं और अपने आराध्य के चरणों में प्रणाम करें। यही सच्ची दीपावली होगी। अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय की प्रतीक।




