नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्रि 2025 इस बार 22 सितंबर से 30 सितंबर तक मनाया जाएगा। भारत में तो इसकी भव्यता जगजाहिर है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि माँ दुर्गा की महिमा भारत तक सीमित नहीं है? विदेशों की धरती पर भी ‘जय माता दी’ की गूंज सुनाई देती है। आइए जानते है उन सभी जगहों के बारे में।
कनाडा, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका से लेकर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड तक माँ दुर्गा के मंदिर बसे हैं कुछ तो सिद्ध शक्तिपीठ हैं, जहां साक्षात मां सती के अंग गिरे थे। इन मंदिरों में नवरात्र के नौ दिन भक्ति और उल्लास का विशेष वातावरण रहता है।
नेपाल: चार शक्तिपीठ, चार रूपों में माँ की उपासना
नेपाल में माँ सती के चार प्रमुख अंग गिरे थे, इसलिए यहां चार शक्तिपीठ स्थित हैं।
गुहेश्वरी शक्तिपीठ: काठमांडू में बागमती नदी के किनारे स्थित इस स्थान पर माँ सती के दोनों घुटने गिरे थे।
दंतकाली शक्तिपीठ: यहां देवी के दांत गिरे थे, और माता को दंतकाली रूप में पूजा जाता है।
खास बात: नवरात्रि में नेपाल के इन शक्तिपीठों में सैकड़ों भारतीय श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, खासकर पशुपतिनाथ और गुहेश्वरी के दर्शन एक साथ करने की मान्यता है।
बांग्लादेश: आज भी जलती हैं श्रद्धा की ज्योत
बांग्लादेश में भी माँ के कई सिद्ध स्थल हैं।
चट्टल भवानी शक्तिपीठ (चिटगांव): चंद्रनाथ पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में माँ की दायीं भुजा गिरी थी।
सुगंधा शक्तिपीठ: यहाँ माँ की नासिका गिरी थी और उन्हें उग्रतारा के नाम से पूजा जाता है।
खास बात: नवरात्र के समय यहाँ विशेष पूजा और प्रसाद वितरण होता है। बांग्लादेश के हिंदू समुदाय के लिए यह मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है।
कनाडा: टोरंटो में गूंजती है आरती
टोरंटो और ब्रैम्पटन जैसे शहरों में बसे भारतीय समुदाय ने वहाँ भव्य दुर्गा मंदिर बनाए हैं।
Shri Durga Temple (टोरंटो): नवरात्र में यहाँ नौ दिन तक दुर्गा सप्तशती पाठ, गरबा नाइट्स और हवन का आयोजन होता है।
वैष्णो देवी मंदिर (ब्रैम्पटन): जम्मू की तर्ज पर बना यह मंदिर भक्तों के लिए घर से दूर घर जैसा अनुभव कराता है।
श्रीलंका: जाफना में माँ इन्द्राक्षी का वास
श्रीलंका के जाफना में स्थित इन्द्राक्षी शक्तिपीठ में माँ सती की पायल गिरी थी। यहाँ माँ के शक्ति रूप की पूजा होती है। विशेष बात यह है कि यह शक्तिपीठ तमिल हिंदुओं और बौद्धों दोनों की आस्था का केंद्र है। यात्रा से पहले मंदिर की वेबसाइट या सोशल मीडिया पेज से पूजा समय और रजिस्ट्रेशन डिटेल्स जरूर जांच लें।कई देशों में ऑनलाइन दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध है खासकर कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके में। गरबा और पूजा के लिए पारंपरिक वस्त्र और थाली की तैयारी भारत से ही कर लें या स्थानीय भारतीय स्टोर से खरीद सकते हैं।
‘माँ’ की भक्ति है सीमाओं से परे
भारत की सीमाएं भले भौगोलिक हों, लेकिन आस्था की सीमा नहीं होती। माँ दुर्गा के भक्त जहाँ भी हैं, वहीं नवरात्रि का उल्लास बसा लेते हैं। विदेशों में बसे मंदिर केवल पूजा के स्थल नहीं, बल्कि संस्कृति, श्रद्धा और पहचान के जीवंत केंद्र हैं।
इस नवरात्रि अगर आप विदेश में हैं, तो भी माँ के दर्शन का मार्ग खुला है।
इन्द्राक्षी शक्तिपीठ (श्रीलंका)
स्थान: जाफना, नल्लूर (श्रीलंका)
दिव्यता: यह वह स्थान है जहाँ माता सती की पायल गिरी थी।
नाम: इस शक्तिपीठ को “इन्द्राक्षी शक्तिपीठ” कहा जाता है।
विशेषता: यह श्रीलंका का प्रमुख सिद्ध शक्तिपीठ है और अत्यंत पवित्र माना जाता है।
हिंगुला शक्तिपीठ (पाकिस्तान)
स्थान: बलूचिस्तान, पाकिस्तान (विशेष रूप से हिंगलाज क्षेत्र)
दिव्यता: यह वह स्थान है जहाँ माता सती का सिर गिरा था।
नाम: इस शक्तिपीठ को “हिंगुला शक्तिपीठ” या “हिंगलाज माता मंदिर” कहा जाता है।
विशेषता: यह एक अत्यंत प्राचीन शक्तिपीठ है और यहाँ माता को हिंगलाज देवी के रूप में पूजा जाता है। यह स्थान आज भी तीर्थयात्रियों के लिए खुला है, विशेषकर पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू समुदाय के लिए।





