नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । दो महीने की बंदी के बाद दिल्ली का नेशनल जूलॉजिकल पार्क फिर से खुल गया है। अब यहां बच्चों की चहल-पहल, परिवारों की हंसी और दूर से सुनाई देती बंगाल टाइगर की दहाड़ का अनुभव फिर से लिया जा सकता है।
चिड़ियाघर को बर्ड फ्लू के कारण बंद किया गया था, लेकिन अब इसे फिर से खोल दिया गया है। शहरवासियों ने इस कदम का उत्साहपूर्वक स्वागत किया है और बच्चों सहित सभी के लिए यह खुशियों भरा अनुभव बन गया है।
चिड़ियाघर खुलते ही पहले ही वीकेंड में भारी भीड़ देखी गई। पहले दिन लगभग 8,000 लोग पहुंचे, जिनमें कई स्कूल के बच्चे अपने नोटबुक लेकर जानवरों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करते नजर आए।
रविवार तक आगंतुकों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई। लोग अपने पसंदीदा जानवरों- शेर, बाघ, हाथी और अन्य जीवो से मिलने पहुंचे। दिल्ली का चिड़ियाघर सिर्फ जानवर देखने का स्थान नहीं, बल्कि कई लोगों के बचपन की यादों से भी जुड़ा हुआ है।
यह वही जगह है जहां लोग आराम से बैठकर पिकनिक मनाते, आइसक्रीम खाते और ढेरों यादगार फोटो खिंचवाते थे। अब सवाल यह है कि चिड़ियाघर में प्रवेश के लिए टिकट की क्या व्यवस्था होगी।
पहले जान लें चिड़ियाघर क्यों बंद था
बता दें कि, अगस्त के अंत में चिड़ियाघर में कुछ पक्षियों की मौत के बाद जांच में पता चला कि उन्हें H5N1 एवियन फ्लू (बर्ड फ्लू) था। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने चिड़ियाघर को तुरंत बंद कर दिया। इसके बाद दो महीने तक सफाई, डिसइंफेक्शन और सुरक्षा जांच का काम चलता रहा ताकि बाकी जानवर और स्टाफ सुरक्षित रहें।
हालांकि यह फैसला आगंतुकों के लिए निराशाजनक था, लेकिन जानवरों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जरूरी था। स्वास्थ्य विभाग की जांच और अनुमति मिलने के बाद ही चिड़ियाघर के दरवाजे दो महीने बाद फिर से खोले गए।
नई इंस्टा टिकट सर्विस
चिड़ियाघर के दोबारा खुलने के साथ नई सुविधा, इंस्टा टिकट बुकिंग सर्विस भी शुरू की गई है। अब लोग गेट पर QR कोड स्कैन करके यूपीआई या कार्ड से तुरंत टिकट खरीद सकते हैं। न लंबी लाइन, न इंतजार। जो पहले से योजना बनाना चाहते हैं, उनके लिए पुरानी ऑनलाइन टिकट वेबसाइट भी चालू है।
क्या है चिड़ियाघर की टाइमिंग
हालांकि यह कोई बड़ी तकनीकी खोज नहीं है, लेकिन बेहद उपयोगी साबित होगी। स्कूल ग्रुप्स और बड़ी भीड़ को देखते हुए, अब टिकट के लिए कम समय और जानवरों को देखने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। चिड़ियाघर की टाइमिंग पहले जैसी ही है। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक, और आखिरी टिकट 4 बजे तक उपलब्ध होगा।
176 एकड़ में फैला है नेशनल जूलॉजिकल पार्क
दिल्ली का नेशनल जूलॉजिकल पार्क किसी साधारण पार्क की तरह नहीं, बल्कि छोटे जंगल जैसा अनुभव देता है। घने पेड़ों की छांव में आप शाही बंगाल टाइगर को आराम करते, एशियाई शेर को अपने इलाके पर नजर रखते और भारतीय गैंडे को धीरे-धीरे टहलते देख सकते हैं। शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए रेप्टाइल हाउस आकर्षण का केंद्र है, जबकि बच्चों का कोना हमेशा चहल-पहल से भरा रहता है। यहां सफेद मोर के नाचते दृश्य भी देखने को मिलते हैं।
टॉय ट्रेन और बोट राइड है मजेदार
मौसम के अनुसार चिड़ियाघर की टॉय ट्रेन और बोट राइड पुराने दिनों की यादें ताजा कर देती हैं, जिससे छोटा ट्रिप भी आधे दिन की मजेदार आउटिंग बन जाता है। आगंतुकों को सलाह दी जाती है कि वे पानी की बोतल साथ लाएं (बाहर का खाना मना है), कम्फर्टेबल जूते पहनें और थोड़ी पैदल चलने की तैयारी करें, क्योंकि यहां काफी चलना पड़ता है।
दिल्ली जू की सबसे बड़ी खासियत
दिल्ली जू की सबसे बड़ी खासियत इसका लोकेशन है। चिड़ियाघर के गेट से बाहर निकलते ही आप इतिहास की गलियों में पहुंच जाते हैं। चारों ओर पुराने किले की दीवारें, मुगल काल के गुंबद और पत्थरों में उकेरी कहानियां नजर आती हैं। सड़क के ठीक सामने स्थित है पुराना किला, जो दिल्ली के इतिहास का शानदार हिस्सा है।
थोड़ी ही दूरी पर खैरुल मंजिल है, जिसे 16वीं सदी में बादशाह अकबर की पालक मां और सलाहकार महम अंगा ने बनवाया था। वहीं, प्रगति मैदान के पास स्थित नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम आपको भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प की रंगीन दुनिया में ले जाता है।
ऐसे पहुंचे चिड़ियाघर?
दिल्ली चिड़ियाघर, या नेशनल जूलॉजिकल पार्क, नई दिल्ली के खूबसूरत लाजपत राय मार्ग पर, पुराना किला के पास स्थित है। यहां पहुंचने के लिए मेट्रो, बस या टैक्सी का इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन प्रगति मैदान (ब्लू लाइन) है, जो लगभग 1 किमी दूर है। मेट्रो स्टेशन से पैदल, रिक्शा या ई-ऑटो से चिड़ियाघर पहुंचा जा सकता है। दिल्ली के किसी भी हिस्से से DTC बसें और कैब सर्विस भी आसानी से उपलब्ध हैं।





