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Sunday, March 15, 2026
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दिल्ली की रहस्यमयी ‘अग्रसेन की बावड़ी’, पाताल लोक के नाम से है मशहूर, जानिए क्‍या है इसका इतिहास ?

दिल्ली में कई पर्यटन स्‍थल है, जिनमें एक पर्यटन स्‍थल अपनी ऐतिहासिकता के लिए काफी खास है। आज हम आपको ऐसे ही एक पर्यटन स्थल से रूबरू कराने जा रहे हैं।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । देश की राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की भरमार है, लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं जो सिर्फ इतिहास नहीं, रहस्यों और कहानियों का संगम भी हैं। ऐसी ही एक जगह है अग्रसेन की बावड़ी, जो मंडी हाउस के पास स्थित है। करीब 106 सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए आप पहुंचते हैं इस प्राचीन बावड़ी में, जिसे लोग ‘धरती का पाताल लोक’ भी कहते हैं। माना जाता है कि यह बावड़ी कई सदियों पुरानी है और इसका निर्माण किसी समय अग्रवाल समाज के पूर्वज राजा अग्रसेन द्वारा कराया गया था। इस रहस्यमयी जगह को लेकर कई भूतिया कहानियां भी प्रचलित हैं। कुछ लोग दावा करते हैं कि यहां अजीब-सी ऊर्जा महसूस होती है, तो कुछ इसे आत्माओं का बसेरा मानते हैं। चलिए आज हम इसके बारे में विस्‍तार से बताते हैं।

जहां गूंजती है कला की आवाज, वहीं छुपा है इतिहास

दिल्ली का मंडी हाउस सिर्फ एक मेट्रो स्टेशन या बिजी एरिया भर नहीं है, बल्कि यह भारत की कला और संस्कृति का दिल भी है। यहीं पर स्थित हैं देश के दो प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) और श्रीराम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स, जहां से देश के कई दिग्गज कलाकारों ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत की है। इन्हीं कला के ठिकानों के पास कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित है एक ऐतिहासिक धरोहर अग्रसेन की बावड़ी। भीड़भाड़ वाले इस इलाके में यह जगह एक शांत और रहस्यमयी कोना है, जहां न सिर्फ पर्यटक बल्कि कॉलेज के छात्र-छात्राएं भी अक्सर रिलैक्स करने के लिए पहुंचते हैं। 

कैसी है ये रहस्यमयी बावड़ी? 

अग्रसेन की बावड़ी देखने में जितनी रहस्यमयी लगती है, उतनी ही शानदार इसकी वास्तुकला भी है। यह बावड़ी एक लंबे, संकरे आयताकार आकार में बनी है, जिसकी लंबाई लगभग 60 मीटर और चौड़ाई करीब 15 मीटर है। यह ऐतिहासिक संरचना तीन स्तरों में बनी हुई है। हर स्तर पर आपको पत्थर की खूबसूरत मेहराबें दिखाई देंगी, जो इसकी स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण हैं। ये मेहराबें न केवल इसकी मजबूती बढ़ाती हैं, बल्कि इसे एक विशिष्ट और भव्य रूप भी देती हैं। बावड़ी के एक सिरे पर स्थित है इसका मुख्य कुआं, जहां तक पहुंचने के लिए आपको 100 से भी ज्‍यादा पत्थर की सीढ़ियों से नीचे उतरना होता है। 

इतिहास से भरपूर, रहस्य से घिरी

अग्रसेन की बावड़ी कितनी पुरानी है, इसका कोई स्पष्ट प्रमाण मौजूद नहीं है, लेकिन अधिकतर इतिहासकार और पुरातत्वविद मानते हैं कि इसका निर्माण 14वीं शताब्दी के आसपास हुआ था। कुछ मान्यताएं इसे राजा अग्रसेन के समय से भी जोड़ती हैं, हालांकि इसका ऐतिहासिक प्रमाण अधूरा है। यह बावड़ी आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारकों में शामिल है और दिल्ली के ऐतिहासिक धरोहरों में एक अहम स्थान रखती है। दिल्ली की भीषण गर्मी में यह जगह शांति और ठंडक का एहसास कराती है। जैसे-जैसे आप इसकी गहराई में उतरते हैं, वैसे-वैसे तापमान गिरता जाता है, जो इसकी इंजीनियरिंग को और भी खास बनाता है। इतना ही नहीं, इसकी प्राकृतिक खूबसूरती और रहस्यमयी माहौल ने कई फिल्ममेकर्स को भी आकर्षित किया है। यहां बॉलीवुड की कई प्रसिद्ध फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।

कुएं के अंदर काला पानी… क्या सच में पागल कर देता है?

अग्रसेन की बावड़ी सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि रहस्यों का अड्डा भी है। यहां के स्थानीय लोगों और आसपास रहने वालों के बीच एक डरावनी मान्यता सालों से चली आ रही है। कहा जाता है कि सदियों पहले इस बावड़ी के कुएं में गहरा, काला पानी भरा रहता था। इस पानी को लेकर मान्यता है कि यह किसी तरह का “माइंड वॉश” करता था, यानी जो भी व्यक्ति उस पानी के पास जाता या उसके अंदर उतरता, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता।

कुछ कहानियों के अनुसार, इस बावड़ी में रहस्यमयी मौतें भी हुई हैं। ऐसे लोग जो इस कुएं की गहराइयों में गए, कभी वापस नहीं लौटे या उनकी मौत अजीब परिस्थितियों में हो गई। आज भी इस बात का कोई वैज्ञानिक या ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिला है कि ऐसा क्यों हुआ और यही बात इसे और भी रहस्यमय बना देती है। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस जगह पर कोई अदृश्य शक्ति मौजूद है, जो लोगों को अपनी ओर खींचती है। कुछ तो यह भी कहते हैं कि जब आप इस बावड़ी में उतरते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे आप पाताल लोक की ओर जा रहे हों।

अग्रसेन की बावड़ी में बसती है एक अनोखी ‘सेना’

अग्रसेन की बावड़ी को लेकर कई भूतिया किस्से और कहानियां वर्षों से सुनी जाती रही हैं, लेकिन हकीकत में यहां जाने वालों को आज तक कोई अलौकिक चीज नहीं मिली। हालांकि, यहां एक ‘सेना’ जरूर मौजूद है कबूतरों की वो विशाल टोली, जिसने इस ऐतिहासिक धरोहर को अपना स्थायी बसेरा बना लिया है। ये कबूतर बावड़ी की मेहराबों और दीवारों पर बैठे दिखाई देते हैं और उनकी गूंजती आवाजें इस जगह की रहस्यमयी शांति को एक अलग ही रंग देती हैं। खास बात ये है कि इस जगह को देखने के लिए आपको कोई टिकट नहीं लेना पड़ता। अग्रसेन की बावड़ी में प्रवेश बिल्कुल मुफ्त है। यहां आप सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक घूम सकते हैं। यदि आप मेट्रो से यात्रा कर रहे हैं, तो मंडी हाउस और बाराखंबा रोड सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन हैं, जहां से आप कुछ ही मिनटों में बावड़ी तक पैदल पहुंच सकते हैं।

डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई जानकारी या सामग्री की हम कोई गारंटी नहीं लेते हैं। लेख प्रस्‍तुत करने का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है।

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