नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत सरकार अब बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों के बाद, भारत में भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी या कड़े नियम बनाने की चर्चा तेज हो गई है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 में संशोधन करके इस तरह की पाबंदी लागू कर सकती है।
ऑस्ट्रेलिया मॉडल अपनाने की तैयारी
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुछ अकाउंट्स ऐसे हैं जिन्हें बच्चों को एक्सेस ही नहीं करना चाहिए। इसके लिए सरकार सोच-समझकर फैसला लेगी कि बच्चों को किन प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच दी जानी चाहिए और किन तक नहीं। हालांकि, सरकार फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध यानी कंप्लीट बैन की तरफ नहीं बढ़ रही है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया मॉडल को देख रही है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोका गया है।
केंद्रीय आईटी मंत्री ने की पुष्टि: सोशल मीडिया पर उम्र-आधारित नियम
केंद्रीय आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने 17 फरवरी 2026 को पुष्टि की कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों से इस मुद्दे पर बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि कई देशों ने मान लिया है कि उम्र के आधार पर रेगुलेशन जरूरी है और यह हमारे डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट का हिस्सा रहा है। फिलहाल सरकार डीपफेक और उम्र-आधारित पाबंदियों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से चर्चा कर रही है।
क्यों उठ रहा है सोशल मीडिया पर बच्चों के लिए सख्ती का मुद्दा
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने चेतावनी दी है कि युवाओं में स्क्रीन एडिक्शन और कंपल्सिव यूज से आर्थिक और सामाजिक नुकसान हो रहा है। सर्वे में सुझाव दिया गया है कि सोशल मीडिया, गैंबलिंग ऐप्स, ऑटो-प्ले फीचर्स और टारगेटेड एड्स पर उम्र-आधारित पाबंदी होनी चाहिए। प्लेटफॉर्म्स को एज वेरिफिकेशन और उम्र-अपयुक्त डिफॉल्ट्स लागू करने की सलाह दी गई है।
यह कदम बच्चों की मेंटल हेल्थ, एडिक्शन, साइबरबुलिंग, अश्लील कंटेंट और डीपफेक जैसी समस्याओं से बचाने के लिए उठाया जा रहा है। फिलहाल भारत में कोई कानून सीधे तौर पर किसी उम्र से कम बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल से रोकता नहीं है, लेकिन DPDP एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों के पर्सनल डेटा को प्रोसेस करने के लिए वेरिफाएबल पैरेंटल कंसेंट जरूरी है। इससे प्लेटफॉर्म्स को बच्चों की डेटा कलेक्शन और टारगेटेड एड्स सीमित करनी पड़ती हैं।
दुनिया में सोशल मीडिया बैन का हाल
दुनिया में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी का कदम तेजी से बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया पहला देश बन गया जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन लागू है। फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल रोकने का बिल पास किया है। वहीं, यूके, स्पेन, डेनमार्क और ग्रीस जैसे देश भी इस तरह की पाबंदियां लागू करने पर विचार कर रहे हैं। भारत में गोवा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्य ऑस्ट्रेलिया मॉडल अपनाने पर विचार कर रहे हैं, और मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र से ऐसा कानून बनाने की सिफारिश भी की है।
भारत में सोशल मीडिया बैन पर चुनौतियां
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) के फाउंडर डायरेक्टर Apar Gupta ने कहा कि भारत में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी सिर्फ कागजी साबित हो सकती है। प्लेटफॉर्म्स को 16 साल से कम उम्र के अकाउंट ब्लॉक करने को कहा जा सकता है, लेकिन इसे लागू करना मुश्किल होगा क्योंकि कई बच्चे फेक उम्र डालकर सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं।
यह प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन है और सरकार सोशल मीडिया कंपनियों से बातचीत कर रही है, लेकिन कोई फाइनल फैसला या टाइमलाइन नहीं आई है। अगर लागू हुआ, तो यह भारत के करोड़ों युवा यूजर्स पर बड़ा असर डालेगा, खासकर तब जब भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया मार्केट है।





