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Monday, March 2, 2026
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रोबोट मामले में सख्ती: Galgotias University पर कार्रवाई, AI इवेंट से हटाया गया नाम

AI समिट में चीनी रोबोडॉग पर मंत्रालय की सख्ती के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने इसे अपना आविष्कार बताने से इनकार करते हुए केवल शैक्षणिक उद्देश्य हेतु खरीदने की सफाई दी है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राजधानी दिल्ली में चल रहे India AI Impact Summit 2026 के दौरान चीनी रोबोटिक डॉग को अपना प्रोजेक्ट बताकर शोकेस करने के आरोप में Galgotias University विवादों में घिर गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस किरकिरी के बाद यूनिवर्सिटी को समिट से बाहर कर दिया गया है और उसके स्टॉल से सभी उपकरण हटा लिए गए हैं। हालांकि, यूनिवर्सिटी की ओर से डॉ. ऐश्वर्या श्रीवास्तव का कहना है कि उन्हें समिट छोड़ने के लिए अब तक कोई आधिकारिक निर्देश नहीं मिला है। मामले ने टेक इवेंट में पारदर्शिता और क्रेडिट को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

आईटी मंत्रालय का सख्त कदम: समिट से हटेगा स्टॉल


Ministry of Electronics and Information Technology के अधिकारियों के मुताबिक Galgotias University को India AI Impact Summit 2026 में लगाए गए अपने काउंटर को खाली करने का निर्देश जारी कर दिया गया है। यानी अब यूनिवर्सिटी को एआई समिट छोड़कर जाना होगा। मंत्रालय की ओर से कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी के स्टॉल से सभी इक्विपमेंट हटा लिए गए हैं। साथ ही जिस इनोवेशन डिवाइस को लेकर दावा किया जा रहा था, उसे भी समिट स्थल से हटा दिया गया है। इस घटनाक्रम ने टेक इवेंट में पारदर्शिता और दावों की जांच को लेकर सख्ती का संकेत दे दिया है।

AI समिट विवाद पर राहुल गांधी का तंज


Rahul Gandhi ने इस पूरे विवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की प्रतिभा और डेटा का सही उपयोग करने के बजाय एआई समिट एक “अव्यवस्थित PR तमाशा” बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय डेटा बेचा जा रहा है और चीनी उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, विवादों में घिरी Galgotias University की ओर से प्रोफेसर नेहा सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर कई बातें वायरल हो जाती हैं, लेकिन वे उन पर टिप्पणी नहीं करना चाहतीं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी एक जिम्मेदार संस्थान है, जो क्वालिटी एजुकेशन और मूल्यों की बात करता है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि कहीं भी यह दावा नहीं किया गया कि संबंधित डिवाइस को यूनिवर्सिटी ने खुद मैन्युफैक्चर किया है।

“जाने को लेकर कोई आदेश नहीं” -यूनिवर्सिटी का दावा


Galgotias University की डॉक्टर ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने कहा है कि उन्हें समिट छोड़ने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है। उनके मुताबिक न तो एग्ज़िबिशन खाली करने का निर्देश दिया गया है और न ही स्टॉल हटाने को कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी अगले दो दिनों तक एग्ज़िबिशन में मौजूद रहेगी। साथ ही, चीनी रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद पर यूनिवर्सिटी ने सफाई देते हुए दोहराया कि उसने कभी यह दावा नहीं किया कि संबंधित डिवाइस को उसने खुद बनाया या मैन्युफैक्चर किया है।

अब मामला साफ तौर पर दो अलग-अलग दावों के बीच खड़ा दिख रहा है-एक तरफ मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि काउंटर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं, और दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी का कहना है कि ऐसा कोई आदेश उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। ऐसे मामलों में आम तौर पर आधिकारिक लिखित आदेश या आयोजन समिति का सार्वजनिक बयान ही स्थिति स्पष्ट करता है। फिलहाल, बयानबाज़ी और दावों का दौर जारी है।

Galgotias University ने अपने बयान में कहा कि डिस्प्ले पर रखा गया रोबोडॉग चीनी रोबोटिक्स कंपनी Unitree Robotics से खरीदा गया है और इसे छात्रों के लिए एक लर्निंग टूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट में लिखा कि हाल ही में मिला यह रोबोडॉग उनके टेक्नोलॉजी सफर का हिस्सा है। यह “सिर्फ दिखाने की मशीन” नहीं बल्कि “चलती-फिरती क्लासरूम” है, जहां छात्र इसके साथ काम कर रहे हैं, इसकी सीमाओं को परख रहे हैं और इस प्रक्रिया में अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने इस रोबोडॉग का निर्माण नहीं किया है और न ही कभी यह दावा किया कि यह उनका खुद का विकसित किया हुआ प्रोडक्ट है।

https://publish.twitter.com/?url=https://twitter.com/GalgotiasGU/status/2023852646927643040

विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया गया कि यूनिवर्सिटी ने Unitree Go2 -जो एक AI-पावर्ड चीनी रोबोडॉग है और कथित तौर पर 2–3 लाख रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध है -को समिट में “ओरियन” नाम से अपने इनोवेशन के रूप में पेश किया। इसके बाद कई यूज़र्स ने आरोप लगाया कि इम्पोर्टेड टेक्नोलॉजी को देश में विकसित बताकर प्रस्तुत किया गया। फिलहाल स्थिति यह है कि सोशल मीडिया पर आरोप जारी हैं, यूनिवर्सिटी अपने दावों से इनकार कर रही है और प्रशासनिक कार्रवाई की खबरें भी सामने आ रही हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष इस बात पर निर्भर करता है कि स्टॉल की ब्रांडिंग, डिस्प्ले और आधिकारिक कम्युनिकेशन में वास्तव में क्या प्रस्तुत किया गया था।

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