नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र की राजनीति से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। जहां उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान बारामती के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की जान चली गई है। इस दुखद हादसे के बाद अब सबकी नजरें ‘ब्लैक बॉक्स’ पर टिकी हैं, जिसे जांच एजेंसियों ने मलबे से बरामद कर लिया है।
महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता अजित पवार
महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता व महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का उनके गृह नगर बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। घने कोहरे और खराब दृश्यता के बीच लैंडिंग की दूसरी कोशिश के दौरान उनका चार्टर्ड विमान बॉम्बार्डियर (Bombardier) द्वारा निर्मित लियरजेट 45 (VT-SSK) क्रैश होकर आग के गोले में तब्दील हो गया। इस हादसे में उनके साथ सवार पीएसओ, अटेंडेंट और दो पायलटों समेत कुल 5 लोगों की जान चली गई है।
लियरजेट 45: अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद हादसा
अजित पवार जिस Learjet 45 विमान में सवार थे, वह एक हाई-एंड कॉर्पोरेट जेट है। यह विमान न केवल अपनी गति बल्कि सुरक्षा फीचर्स के लिए भी जाना जाता है। अजित पवार जिस लियरजेट 45 में सवार थे, वह एक हाई-स्पीड कॉर्पोरेट जेट है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के नियमों के अनुसार, इस श्रेणी के विमानों में ब्लैक बॉक्स का होना अनिवार्य है। वही जांच टीम ने पुष्टि की है कि विमान का ब्लैक बॉक्स मिल गया है।इसमें FDR (Flight Data Recorder) और CVR (Cockpit Voice Recorder) दोनों मौजूद हैं। यह डिवाइस विमान की गति, इंजन की स्थिति और पायलटों की आखिरी बातचीत का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख देगा।
‘ब्लैक बॉक्स’: नाम काला, पर काम उजाला
भले ही इसे ‘ब्लैक बॉक्स’ कहा जाता है, लेकिन इसका रंग चमकीला नारंगी (Bright Orange) होता है। इसके पीछे का विज्ञान बेहद रोचक हैनारंगी रंग इसलिए चुना जाता है ताकि मलबे या जंगलों के बीच इसे आसानी से पहचाना जा सके। यह टाइटेनियम या स्टेनलेस स्टील से बना होता है। यह 1100 ∘C की भीषण आग और समंदर की गहराइयों के दबाव को झेलने में सक्षम है।
हर प्राइवेट विमान में यह क्यों नहीं होता?
अक्सर लोग सवाल उठाते हैं कि जब यह इतना जरूरी है, तो हर छोटे प्लेन में क्यों नहीं लगाया जाता? इसके पीछे दो मुख्य कारण है। छोटे दो से चार सीटर विमानों (जैसे ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट) में जगह बहुत कम होती है। एक भारी और क्रैश-रेसिस्टेंट रिकॉर्डर लगाने से विमान की उड़ान क्षमता और ईंधन खपत पर बुरा असर पड़ता है। एक मानक ब्लैक बॉक्स सिस्टम की कीमत और रखरखाव $60,000 (लगभग 50 लाख रुपये) से अधिक हो सकता है। छोटे निजी विमानों के लिए यह खर्च उनकी कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा होता है।
दो हिस्सों में कैद होती है पूरी कहानी
ब्लैक बॉक्स असल में दो मशीनों का मेल है
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR): यह विमान की ऊंचाई, ईंधन का स्तर और तकनीकी मापदंडों को रिकॉर्ड करता है।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR): यह पायलटों के बीच हुई बातचीत और कॉकपिट में आए किसी भी अलार्म या शोर को रिकॉर्ड करता है।
क्या हर प्राइवेट प्लेन में होता है ब्लैक बॉक्स?
अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या हर छोटे विमान में यह सुरक्षा कवच होता है तो जवाब है नहीं। छोटे 2-4 सीटर विमानों में वजन संतुलित रखना बड़ी चुनौती होती है, वहां भारी ब्लैक बॉक्स लगाना संभव नहीं होता।एक मानक ब्लैक बॉक्स सिस्टम की कीमत और रखरखाव $60,000 (करीब 50 लाख रुपये) से अधिक हो सकती है।भारत में नागरिक उड्डयन नियामक संस्था के नियमों के अनुसार, बड़े कॉर्पोरेट जेट्स और कमर्शियल उड़ानों के लिए ही यह अनिवार्य है। छोटे विमान, वजन के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। एक पारंपरिक ब्लैक बॉक्स और उसका सुरक्षा कवच काफी भारी होता है। अगर छोटे विमान में 20-30 किलोग्राम का अतिरिक्त डेड-वेट जोड़ा जाए, तो उसकी ईंधन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है या फिर वह एक यात्री कम ले जा पाएगा।
कम वजन वाले विमानों के लिए ‘फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर’ अनिवार्य नहीं
ब्लैक बॉक्स को लगातार डेटा रिकॉर्ड करने के लिए विमान के इलेक्ट्रिकल सिस्टम से बिजली की जरूरत होती है। छोटे विमानों के अल्टरनेटर और बैटरी सिस्टम इतने बड़े नहीं होते कि वे जटिल रिकॉर्डिंग सिस्टम का भार बिना किसी जोखिम के उठा सकें।दुनिया भर में विमानन नियामक (जैसे भारत में DGCA और अमेरिका में FAA) वजन और इंजन के प्रकार के आधार पर नियम तय करते हैं। आमतौर पर 5,700 किलोग्राम से कम वजन वाले विमानों के लिए ‘फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर’ (FDR) अनिवार्य नहीं होता।
लियरजेट 45 एक कॉर्पोरेट/बिजनेस जेट है
लियरजेट 45 एक कॉर्पोरेट/बिजनेस जेट है, जो अक्सर चार्टर उड़ानों के लिए उपयोग होता है। विमानन नियमों के अनुसार, एक निश्चित वजन (आमतौर पर 5,700 किलोग्राम से अधिक) या क्षमता वाले कमर्शियल और बड़े प्राइवेट जेट्स में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) अनिवार्य होते हैं।
ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट (जैसे सेसना 152 या 172) छोटे और हल्के होते हैं। इनमें भारी और महंगे ब्लैक बॉक्स सिस्टम को लगाना आर्थिक और तकनीकी रूप से व्यावहारिक नहीं माना जाता। इसके विपरीत, लियरजेट 45 जैसे जटिल जेट्स में सैकड़ों मापदंडों (पैरामीटर्स) को ट्रैक करने की क्षमता होती है।
छोटे ‘ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट’ में ब्लैक बॉक्स नहीं मिलता
यही कारण है कि अजित पवार के मामले में ‘लियरजेट 45’ में यह मौजूद था, क्योंकि वह एक बड़ा और भारी कॉर्पोरेट जेट है, जबकि छोटे ‘ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट’ में यह नहीं मिलता। हालांकि पुराने ब्लैक बॉक्स भारी थे, लेकिन अब तकनीक बदल रही हैअब Appareo जैसे नए डिजिटल और हल्के रिकॉर्डर आ रहे हैं जो वजन में कम हैं।कई छोटे विमान अब G1000 जैसे डिजिटल कॉकपिट का उपयोग करते हैं, जो एक SD कार्ड में फ्लाइट डेटा सेव कर लेते हैं। हालांकि, ये ब्लैक बॉक्स जितने मजबूत (Crash-resistant) नहीं होते।
अजित पवार के मामले में, विमान का बड़ा होना और उसमें ब्लैक बॉक्स का मौजूद होना जांच के लिए निर्णायक साबित होगा। क्या यह खराब मौसम का परिणाम था या कोई तकनीकी चूक? इसका सच जल्द ही सामने आएगा।




