नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) के नेतृत्व में AIADMK कैडर राइट्स रिट्रीवल कमेटी ने गुरुवार, 31 जुलाई को बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से अपना संबंध समाप्त कर लिया। इस अहम राजनीतिक घटनाक्रम से कुछ घंटे पहले ही पन्नीरसेल्वम ने मॉर्निंग वॉक के दौरान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात की थी।
पन्नीरसेल्वम ने NDA से तोड़ा नाता
तमिलनाडु में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व वाले गुट ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से अलग होने का फैसला किया है। पूर्व मंत्री और ओपीएस के करीबी सहयोगी पनरुट्टी एस. रामचंद्रन ने गुरुवार को इस फैसले की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने कहा, “हमारा समूह अब एनडीए गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगा।” इस दौरान पन्नीरसेल्वम स्वयं भी मौके पर उपस्थित थे।
क्या पन्नीरसेल्वम अभिनेता विजय की पार्टी से करेंगे गठबंधन?
एस. रामचंद्रन ने संकेत दिए कि पन्नीरसेल्वम आगामी 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले पूरे राज्य का दौरा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका किसी भी राजनीतिक दल के साथ कोई गठबंधन नहीं है, लेकिन चुनाव के नजदीक आने पर संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
रामचंद्रन ने कहा, “फिलहाल किसी पार्टी से कोई गठबंधन तय नहीं है। जैसे-जैसे चुनाव करीब आएंगे, हम रणनीति पर फैसला लेंगे।” पन्नीरसेल्वम ने अभिनेता विजय की नवगठित पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के साथ भविष्य में गठबंधन की संभावना को खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा, “समय बताएगा कि हम किसके साथ जाएंगे। अभी चुनाव में समय है, इसलिए हम सभी विकल्पों को खुला रख रहे हैं।” गौरतलब है कि पन्नीरसेल्वम कभी AIADMK के प्रमुख चेहरा रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर लंबे समय तक चले नेतृत्व संघर्ष के बाद उन्होंने अपना अलग राजनीतिक गुट बना लिया था।
बीजेपी से क्यों खफा हैं पन्नीरसेल्वम?
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता ओ. पन्नीरसेल्वम की नाराजगी की वजहें अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, ओपीएस ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर औपचारिक मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन उन्हें मिलने का मौका नहीं मिला। माना जा रहा है कि इसी उपेक्षा ने उनके मन में नाराजगी पैदा की। इसके कुछ ही समय बाद ओपीएस ने केंद्र सरकार पर सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के तहत मिलने वाले फंड के वितरण में देरी को लेकर सोशल मीडिया के जरिए तीखा हमला बोला। इस कदम को बीजेपी के प्रति उनके असंतोष के रूप में देखा जा रहा है।





