नई दिल्ली, रफ्तार। पेरिस में करीब 100 साल बाद ओलंपिक का आयोजन हो रहा है। यहां पिछला ओलंपिक साल 1947 में हुआ था। इतने साल में वहां औसत तापमान 1.8 डिग्री बढ़ा है। वहीं, हीटवेव की 50 बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में इस साल हो रहे ओलंपिक आयोजन के दौरान खिलाड़ियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। दरअसल, साल 2003 के हीटवेव में फ्रांस में 14 हजार लोगों की मौत हुई थी। उसके बाद से गर्मी का स्तर और चरम पर पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार तापमान करीब 10 गुना बढ़ा है। गर्मी से पेरिस में मरने वालों की संख्या में 70 फीसदी का इजाफा हुआ है। पेरिस ओलंपिक के दौरान दो हफ्ते तक हीटवेव का पूर्वानुमान है। ऐसा साल 2003 में भी हुआ था। इस बार 2003 से ज्यादा बुरी स्थिति हो सकती है।
जुलाई में 2 डिग्री बढ़ेगा अधिकतम तापमान
जुलाई में न्यूनतम तापमान में 2.8 डिग्री की बढ़ोतरी का अनुमान है। अधिकतम में 2 डिग्री इजाफा हो सकता है। अगस्त में न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री और अधिकतम पारा 2.4 डिग्री बढ़ने की आशंका है। सितंबर में न्यूनतम तापमान 2.1 डिग्री और अधिकतम तापमान 1.2 डिग्री अधिक होगा। जुलाई से सितंबर तक न्यूनतम तापमान में 2.6 डिग्री ज्यादा और अधिकतम तापमान 1.9 डिग्री अधिक रहेगा। औसत तापमान में 2.2 डिग्री की बढ़ोतरी रहेगी।
ओपन एरिया में खराब हो सकती है दर्शकों की हालत
ओलंपिक्स में धूप और तेज गर्मी के चलते मैराथन, टेनिस, बीच वॉलीबॉल प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार खिलाड़ियों में सहने की क्षमता रहती है, लेकिन दर्शकों में नहीं होती। ओपन एरिया में दर्शकों की हालत खराब हो सकती है। बता दें, पिछली बार टोक्यो ओलंपिक को सबसे गर्म इवेंट बताया जा रहा था। तब तापमान 30 डिग्री से ऊपर था। 80 फीसदी ह्यूमिडिटी थी। टोक्यो में मैराथन और रेस के इवेंट को ठंडी जगह पर शिफ्ट किया गया था, जिसके बावजूद वहां खिलाड़ियों की हालत खराब हो गई थी। रूसी टेनिस प्लेयर डैनिल मेदवदेव ने कोर्ट में कहा था कि इतनी गर्मी है कि मैं मर न जाऊं।
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