संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञोँ की उत्तर कोरिया में भुखमरी की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञोँ की उत्तर कोरिया में भुखमरी की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञोँ की उत्तर कोरिया में भुखमरी की चेतावनी

नई दिल्ली, 9 जून (हि.स.)। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञ ने मंगलवार को उत्तर कोरिया में भोजन की व्यापक कमी होने और कुपोषण फैलने की चेतावनी दी। जिसे कोविड-19 को रोकने के लिए लागू कठोर संगरोध उपायों और चीन के साथ लगभग पांच महीने से बंद सीमा ने और बदतर बना दिया है। उत्तर कोरिया में मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक टॉमस ओजिया क्विंटाना ने सुरक्षा परिषद से परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के कारण साम्यवादी देश पर लगाए गए प्रतिबंधों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया, ताकि वहां पर खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उत्तर कोरिया में 1990 के दशक के मध्य में एक अकाल से 30 लाख लोगों की मौत होने की पहले से ही आशंका है। उत्तर कोरिया विश्व स्वास्थ्य संगठन को COVID-19 मामलों की रिपोर्ट नहीं करता है। ओजिया क्विंटाना ने कहा कि महामारी ने उत्तर कोरिया के लिए "विशाल आर्थिक कठिनाई" पैदा कर दी है। मार्च और अप्रैल में चीन के साथ व्यापार में 90% की गिरावट के साथ आय में कमी आई है। बड़े शहरों में बेघर लोगों की संख्या में वृद्धि और दवा की कीमतें आसमान छूने की खबरों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने एक बयान में कहा कि ऐसे परिवारों की संख्या बढ़ती जा रही है जो दिन में केवल दो बार खाते हैं, या केवल मकई खाते हैं और कुछ भूख से मर रहे हैं। ओजिया क्विंटाना ने प्योंगयांग से “बिना प्रतिबंध” के मानवीय सहायता पहुंचाने की अनुमति देने का आग्रह किया। राजधानी के बाहर संचालन निलंबित कर दिया गया है, जिससे सीमा पर टीका स्टॉक और अन्य सहायता फंस गई हैं। उन्होंने महामारी के दौरान उत्तर कोरिया में कैदियों को मुक्त करने का भी आग्रह किया। जिसके लिये कड़ी मेहनत, भोजन की कमी, संक्रामक रोगों और अतिवृष्टि के कारण कैदियों की बढ़ती मौतों का का हवाला दिया गया। यू.एन. वर्ल्ड वर्ल्ड प्रोग्राम की प्रवक्ता एलिजाबेथ बायर्स ने संवाददाताओं से कहा कि उत्तर कोरिया में मानवीय स्थिति निम्न स्तर की बनी हुई है। उन्होंने कहा कि 10 मिलियन से अधिक लोग या 40% आबादी को मानवीय सहायता की आवश्यकता है। डब्ल्यूएफपी को इस साल खाद्य राशन के साथ 1.2 मिलियन लोगों तक पहुंचने की उम्मीद है। बायर ने कहा कि व्यापक कुपोषण ने बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को नुकसान पहुंचाया है। हिन्दुस्थान समाचार/राकेश सिंह/कुसुम-hindusthansamachar.in

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