नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत के पूर्व कप्तान और स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने हाल ही में अपना फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है, लेकिन इस बार उनका टेस्ट बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) में नहीं बल्कि लंदन में हुआ। बीसीसीआई ने कोहली को इस टेस्ट के लिए विशेष अनुमति दी, जिससे बोर्ड के नियमों और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
फिटनेस टेस्ट की तकनीकी प्रक्रिया क्या होती है?
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने फिटनेस टेस्ट को दो चरणों में बांटा है। पहला चरण होता है यो-यो रन टेस्ट (Yo-Yo Test), जो खिलाड़ियों की एरोबिक फिटनेस और तेजी से रिकवरी की क्षमता को मापता है। इसमें खिलाड़ियों को लगातार बढ़ती हुई गति पर 20 मीटर दौड़ पूरी करनी होती है। टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी लंबे समय तक मैदान पर टिक सकते हैं और अधिक ऊर्जा के साथ खेल सकते हैं।
दूसरा चरण है स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग टेस्ट, जिसमें खिलाड़ियों की ताकत, सहनशक्ति, और फुर्ती को परखा जाता है। इसमें बॉडी कंपोजिशन, मसल स्टैमिना, और फिजिकल टेस्टिंग होती है, जो खिलाड़ियों की समग्र फिटनेस स्तर को दर्शाता है। यह टेस्ट टीम के फिजियो और फिटनेस ट्रेनर्स की निगरानी में होता है।
BCCI के फिटनेस नियम क्या हैं?
BCCI के नियमों के अनुसार, सभी राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों को प्रत्येक सत्र के शुरू होने से पहले फिटनेस टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है। यह टेस्ट राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA), बेंगलुरु में आयोजित किया जाता है, जिससे खिलाड़ियों की फिटनेस एक समान स्तर पर परखी जा सके। नियम के तहत फिटनेस टेस्ट पास करने वाले खिलाड़ी ही अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मैचों में खेलने के लिए चयन के काबिल माने जाते हैं।
विराट कोहली को क्यों मिली छूट?
हालांकि नियम साफ हैं, लेकिन विराट कोहली को लंदन में फिटनेस टेस्ट देने की अनुमति दी गई। बीसीसीआई सूत्रों के मुताबिक, कोहली ने व्यक्तिगत कारणों से यह टेस्ट विदेश में देने की मांग की थी, क्योंकि वे अपने परिवार के साथ लंदन में रह रहे थे। बोर्ड ने उनके अनुरोध को स्वीकार किया और कोविड-19 महामारी के बाद पाबंदियों को ध्यान में रखते हुए यह छूट दी।
हालांकि, बीसीसीआई ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या भविष्य में किसी और खिलाड़ी को भी विदेश में टेस्ट देने की अनुमति मिलेगी या यह केवल कोहली के लिए विशेष व्यवस्था थी।
विवाद और संभावित असर
कोहली के लिए दी गई छूट पर खिलाड़ियों और फैंस के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि यह कदम विराट कोहली की अहमियत और स्थिति को दर्शाता है, जबकि कईयों का मानना है कि नियमों में छूट देना टीम की अनुशासन और एकरूपता के लिए ठीक नहीं है।
एक अखबार के ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट टीम ने फिटनेस के मामले में कमर कस ली है। हाल ही में 30 खिलाड़ियों ने अपनी फिटनेस साबित करने के लिए यो-यो टेस्ट और ताकत परीक्षण का सफलतापूर्वक सामना किया है। इस लिस्ट में रोहित शर्मा, मोहम्मद सिराज, शुभमन गिल, ऋतुराज गायकवाड़, हार्दिक पंड्या, सूर्यकुमार यादव और यशस्वी जयसवाल जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जो अपनी परफॉर्मेंस के साथ-साथ फिटनेस में भी कमाल दिखा रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ऋषभ पंत और रवींद्र जड़ेजा जैसे अनुभवी सितारों का फिटनेस टेस्ट जल्द ही लिया जाएगा, जबकि केएल राहुल, आकाश दीप और नितीश कुमार रेड्डी जैसे युवा सितारे भी फिटनेस टेस्ट के अगले चरण का हिस्सा होंगे।यह फिटनेस टेस्ट भारतीय टीम की तैयारियों का अहम हिस्सा बन गया है, जिससे टीम न केवल तकनीकी बल्कि शारीरिक रूप से भी मैच जिताने के लिए तैयार हो सके।
इस फैसले से यह सवाल भी उठता है कि क्या बीसीसीआई को फिटनेस टेस्ट की प्रक्रिया और नीति को और अधिक पारदर्शी और स्पष्ट बनाना चाहिए ताकि सभी खिलाड़ियों के साथ समान व्यवहार हो। इस मामले में फैंस और पूर्व खिलाड़ियों की नजरें अब बीसीसीआई पर टिकी हैं।





