नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । महिला क्रिकेट भी दुनिया भर में तेजी से उभर रहा है। अब अधिकांश देशों की टीमें सक्रिय हैं। क्रिकेट जगत में भारत का दबदबा कायम है। भारतीय मेंस टीम ने टी20 वर्ल्ड कप 2024 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 अपने नाम कर धमाका किया। वुमेंस टीम भी शानदार प्रदर्शन कर रही है, देश को गौरवान्वित करते हुए क्रिकेट प्रेमियों के दिल जीत रही है।
क्रिकेट में भारत ने नयी मिसाल कायम की है। लेकिन क्या बीसीसीआई पुरुष और महिला खिलाड़ियों को प्रति मैच समान सैलरी देती है। मेंस और वुमेंस टीम के सितारे देश का नाम रोशन कर रहे हैं, वे लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे है।
मेंस और वुमेंस की एक समान सैलरी
बीसीसीआई ने पुरुष और महिला क्रिकेटर्स को बराबरी का सम्मान दिया है। टेस्ट मैच के लिए 15 लाख, वनडे के लिए 6 लाख और टी20 इंटरनेशनल के लिए 3 लाख रुपये प्रति मैच फीस समान रूप से प्रदान की जाती है। यह कदम लैंगिक समानता और खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाता है।
मेंस और वुमेंस के टॉप ग्रेड में 6.50 करोड़ का अंतर
बीसीसीआई में सैलरी में अभी भी अंतर है। महिला क्रिकेटर्स के ‘ग्रेड ए’ में शामिल खिलाड़ियों को सालाना 50 लाख रुपए मिलते हैं, जबकि पुरुष क्रिकेटर्स के ‘ग्रेड ए+’ में शामिल खिलाड़ियों की सालाना सैलरी 7 करोड़ रुपये है। इस कदम ने समय समय पर बहस को जन्म दिया है।
मेंस और वुमेंस के सेकंड ग्रेड में 16 गुना से ज्यादा का अंतर
महिला क्रिकेटर्स की ‘ग्रेड बी’ सालाना 30 लाख रुपए पाती हैं, जबकि पुरुष क्रिकेटर्स की ‘ग्रेड ए’ में यह रकम 5 करोड़ है। यानी दोनों में 16 गुना से ज्यादा अंतर है। सैलरी में यह भारी अंतर से क्रिकेट जगत पर कई सवाल खड़े करती है।
मेंस और वुमेंस के थर्ड ग्रेड में अंतर 30 गुना
महिला क्रिकेटर्स की ‘ग्रेड C’ सालाना 10 लाख रुपए पाती हैं, जबकि पुरुषों के ‘ग्रेड B’ में 3 करोड़ और ‘ग्रेड C’ में 1 करोड़ रुपए मिलते हैं। महिला क्रिकेट में चौथी ग्रेड अभी तक नहीं है। सैलरी में 30 गुना तक का अंतर लैंगिक असमानता उजागर करता है।




