नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व खिलाड़ी मनोज तिवारी ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर ने रोहित शर्मा को वनडे कप्तानी से हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मनोज तिवारी का मानना है कि यह निर्णय सीधे तौर पर चयन समिति के प्रमुख अजीत अगरकर ने नहीं लिया, बल्कि गंभीर के इनपुट और प्रभाव के चलते लागू किया गया।
कप्तानी का फैसला और शुभमन गिल का चयन
बीसीसीआई ने अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की ODI सीरीज के लिए भारतीय टीम घोषित की थी। इस घोषणा में रोहित शर्मा की जगह युवा शुभमन गिल को नया कप्तान बनाया गया। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में कई सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि रोहित वनडे में बेहतरीन फॉर्म में थे और 2027 विश्व कप की तैयारियों में जुटे थे।
रोहित का उत्साह और मनोज तिवारी की चिंता
मनोज तिवारी ने रोहित शर्मा को कप्तानी से हटाए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इसके बाद रोहित का जोश और मैदान पर उनकी सक्रियता पहले जैसी नहीं रही। मनोज तिवारी ने बताया कि उन्होंने रोहित के साथ खेला है और ऐसे दिग्गज खिलाड़ी को हटाना उन्हें असम्मानजनक लगा। उन्होंने रोहित के नेतृत्व और प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि यह फैसला किसी भी क्रिकेटिंग तर्क पर आधारित नहीं था।
मनोज तिवारी ने रोहित के रिकॉर्ड का बचाव किया
मनोज तिवारी ने बताया कि रोहित शर्मा ने कप्तान के तौर पर दो ICC ट्रॉफी जीतने में टीम का नेतृत्व किया है और 2023 वर्ल्ड कप फाइनल में भी भारत जीत सकता था।मनोज तिवारी का कहना है कि यदि कप्तानी युवा खिलाड़ी को देनी ही थी, तो इसे धीरे-धीरे और सम्मानजनक तरीके से लागू किया जाना चाहिए था।
प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर चर्चा
अब तक बीसीसीआई, अजीत अगरकर या गौतम गंभीर की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन मनोज तिवारी के आरोप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। जिसमें एक तरफ रोहित समर्थक हैं और दूसरी तरफ युवा कप्तान शुभमन गिल के पक्ष में लोग हैं।
टीम में बदलाव और रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि टीम में युवा कप्तान लाना लंबी अवधि की रणनीति हो सकती है, लेकिन इसके तरीके और समय ने विवाद पैदा कर दिया है। तिवारी के आरोपों ने इस फैसले पर सवाल खड़ा कर दिया है और बीसीसीआई के लिए इस पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग बढ़ गई है।





