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Friday, March 6, 2026
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भारतीय फुटबॉल पर संकट के बादल, ISL के भविष्य पर सवाल, दिग्गज खिलाड़ियों ने FIFA से लगाई गुहार

भारतीय फुटबॉल गंभीर संकट में है और इंडियन सुपर लीग के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे खिलाड़ी, क्लब और फैंस सभी परेशान हैं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय फुटबॉल इस वक्त अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित फुटबॉल लीग इंडियन सुपर लीग (ISL) का भविष्य अनिश्चितताओं में फंसा हुआ है। जनवरी का महीना चल रहा है, लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ISL का अगला सीजन आयोजित होगा या नहीं। इस असमंजस ने न सिर्फ खिलाड़ियों बल्कि कोचिंग स्टाफ, क्लब प्रबंधन और लाखों फुटबॉल प्रशंसकों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है।

“इंडियन सुपर लीग के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करे”

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि भारतीय फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ियों को मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था FIFA तक का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। भारतीय टीम के कप्तान सुनील छेत्री, अनुभवी गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू और डिफेंडर संदेश झिंगन जैसे बड़े नामों ने सार्वजनिक रूप से FIFA से अपील की है कि वह भारत में फुटबॉल की बिगड़ती हालत पर हस्तक्षेप करे और इंडियन सुपर लीग के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करे।

“भारतीय फुटबॉल की मौजूदा स्थिति को बयां करने के लिए काफी है”

सुनील छेत्री ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा, यह जनवरी का महीना है और इस वक्त हमें इंडियन सुपर लीग में खेलते हुए आपकी टीवी स्क्रीन पर दिखना चाहिए था। लेकिन हकीकत यह है कि खिलाड़ियों को अब तक यह भी नहीं पता कि लीग होगी या नहीं। छेत्री का यह बयान भारतीय फुटबॉल की मौजूदा स्थिति को बयां करने के लिए काफी है।

“खिलाड़ी इस समय डर और हताशा के माहौल में जी रहे हैं”

वहीं, गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि खिलाड़ी इस समय डर और हताशा के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ISL में खेलने के बजाय खिलाड़ी अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। उन्हें नहीं पता कि आगे क्या होगा, करियर किस दिशा में जाएगा और आर्थिक सुरक्षा कैसे बनी रहेगी। संदेश झिंगन ने भी खिलाड़ियों, स्टाफ और फैंस के लिए स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है।

फ्रेंचाइजी क्लबों ने स्पष्ट किया है कि वे ISL में तभी लगातार हिस्सा लेंगे

इस पूरे संकट के बीच ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बीते गुरुवार को AIFF को इंडियन सुपर लीग की लगभग सभी फ्रेंचाइजी से पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें क्लबों ने लीग में हिस्सा लेने की इच्छा जताई है, लेकिन साथ ही कई अहम शर्तें भी रखी हैं। क्लबों का कहना है कि उनकी भागीदारी AIFF द्वारा दिए जाने वाले वित्तीय और प्रशासनिक आश्वासनों पर निर्भर करेगी।

फ्रेंचाइजी क्लबों ने स्पष्ट किया है कि वे ISL में तभी लगातार हिस्सा लेंगे, जब AIFF यह सुनिश्चित करे कि लीग में भागीदारी के लिए कोई प्रशासनिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, अगर सीजन की अवधि कम होती है या आयोजन में देरी होती है, तो उससे जुड़ी अतिरिक्त परिचालन लागत की पूरी जिम्मेदारी AIFF को लेनी होगी। क्लबों का मानना है कि मौजूदा अनिश्चितता में आर्थिक बोझ डालना उनके लिए संभव नहीं है।

इंडियन सुपर लीग की स्थापना साल 2013 में हुई थी

इंडियन सुपर लीग की स्थापना साल 2013 में हुई थी और यह लीग भारतीय फुटबॉल के लिए गेमचेंजर साबित हुई। ISL ने न केवल घरेलू खिलाड़ियों को मंच दिया, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलरों को भी भारत लाने में अहम भूमिका निभाई। लीग ने फुटबॉल को नए दर्शक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यावसायिक पहचान दी। लेकिन अब वही लीग अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है।

ISL का आखिरी सीजन 2024-25 में खेला गया था। इसके बाद से ही लीग के भविष्य को लेकर कोई ठोस रोडमैप सामने नहीं आया है। नीलामी, शेड्यूल, प्रसारण और स्पॉन्सरशिप जैसे अहम मुद्दों पर स्थिति साफ नहीं होने से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।

भारत आने से कतराएंगे और फैंस का भरोसा भी कमजोर होगा

फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर भारतीय फुटबॉल के विकास पर पड़ेगा। युवा खिलाड़ियों का मनोबल टूटेगा, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भारत आने से कतराएंगे और फैंस का भरोसा भी कमजोर होगा।

ऐसे में अब सबकी नजर FIFA और AIFF पर टिकी है। खिलाड़ियों की उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्था FIFA इस मामले में दखल देगी और भारतीय फुटबॉल को इस संकट से बाहर निकालने में मदद करेगी। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह संकट भारतीय फुटबॉल के लिए लंबे समय तक नुकसानदेह साबित हो सकता है।

भारतीय फुटबॉल आज एक मोड़ पर खड़ा है

भारतीय फुटबॉल आज एक मोड़ पर खड़ा है, जहां सही फैसले उसे नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं, जबकि देरी और असमंजस उसे पीछे धकेल सकते हैं। अब देखना होगा कि सिस्टम इस चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या खिलाड़ियों की यह ‘बचा लो’ की गुहार सुनी जाती है या नहीं।

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