नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल ने कोरियोग्राफर धनश्री वर्मा से तलाक के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी मानसिक स्थिति और निजी संघर्षों को लेकर चुप्पी तोड़ी है। एक हालिया इंटरव्यू में चहल ने स्वीकार किया कि तलाक की प्रक्रिया और उसके बाद की स्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से बुरी तरह झकझोर दिया था। यहां तक कि उनके मन में आत्महत्या जैसे विचार भी आने लगे थे।
चहल ने कहा कि उन्होंने और धनश्री ने कई महीनों पहले ही अलग होने का फैसला ले लिया था, लेकिन रिश्ते को एक और मौका देने की कोशिश में कुछ समय तक निर्णय को टालते रहे। हालांकि हालात में सुधार नहीं हुआ और अंततः दोनों को अलग होना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि तलाक के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर “धोखेबाज” जैसे शब्दों का सामना करना पड़ा, जिसने उनकी मानसिक स्थिति को और खराब कर दिया।
“मुझे धोखेबाज कहा गया” – युजवेंद्र चहल
राज शामानी के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान चहल ने बताया कि तलाक के बाद उन्हें “धोखेबाज” जैसे आरोपों का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। चहल ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी शादीशुदा जिंदगी को सोशल मीडिया पर हमेशा सकारात्मक रूप में पेश किया, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि शायद सबकुछ फिर से ठीक हो जाएगा।
उन्होंने कहा, “हां… मैं यही सोचकर सोशल मीडिया पर अपनी शादी को परफेक्ट दिखा रहा था, कि शायद हम दोनों फिर से एक हो जाएंगे। मुझे लगता था कि फैसला बदल सकता है और सब पहले जैसा हो जाएगा।” तलाक के बाद मिले आरोपों को लेकर चहल भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “मुझे धोखेबाज कहा गया, जबकि मैंने कभी किसी को धोखा नहीं दिया। मैं एक वफादार इंसान हूं। मेरे जैसा लॉयल आपको शायद ही मिले। मैं अपने लोगों की फिक्र करता हूं।” चहल ने आगे कहा कि सबसे ज्यादा तकलीफ उन्हें इस बात से होती है कि लोग पूरी सच्चाई जाने बिना ही किसी को जज कर लेते हैं। किसी को यह नहीं पता कि असल में क्या हुआ… और फिर भी मुझे गलत ठहराया गया। इन बातों से मुझे बहुत तकलीफ होती है।
चहल ने बताया तलाक की असली वजह
युजवेंद्र चहल ने कहा कि शादी एक “समझौता” होती है, जिसमें दोनों पक्षों का सहयोग जरूरी होता है। लेकिन समय के साथ जब आपसी तालमेल और साथ बिताए पल कम होने लगते हैं, तो दूरियां बढ़ जाती हैं। चहल ने कहा, “हम दोनों अपने-अपने करियर में बहुत व्यस्त थे। इसी वजह से न हम एक-दूसरे को समय दे पाए और न ही वो साथ रह पाने वाली सहजता बनी रही।” उन्होंने माना कि रिश्तों में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब वे मतभेद गहराने लगते हैं और उनका समाधान नहीं हो पाता, तो हालात खराब हो जाते हैं। इसी तरह का असर हमारे रिश्ते पर भी पड़ा।





