नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय हॉकी के एक चमकते सितारे और खेल, चिकित्सा के जानकार डॉक्टर Vece Paes का आज कोलकाता के एक अस्पताल में निधन हो गया। 80 वर्ष की उम्र में उनकी विदाई ने पूरे खेल जगत को स्तब्ध कर दिया है। वे न केवल भारत के लिए हॉकी के मैदान पर एक सम्मानित खिलाड़ी थे, बल्कि बीसीसीआई में डोपिंग रोधी विभाग में उनकी भूमिका ने खेल की साफ-सुथरी छवि को मजबूती दी।1972 के म्यूनिख ओलंपिक में रजत पदक विजेता रहे है। वहीं BCCI में डोपिंग नियंत्रण विभाग में सेवा देने वाले Vece Paes का जाना खेल जगत को एक बड़ी क्षति पहुंची है।
1972 म्यूनिख ओलंपिक में रजत पदक विजेता टीम के मिडफील्डर
Vece Paes का जन्म 30 अप्रैल 1945 को हुआ था। उन्होंने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के मिडफील्डर के रूप में हिस्सा लिया, जहां टीम ने रजत पदक जीता था। इसके अलावा, वे 1971 में हुए हॉकी वर्ल्ड कप में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम के भी अहम सदस्य थे। अपने खेल करियर के बाद Vece Paes न केवल खेल के मैदान पर बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ गए। स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने बीसीसीआई के डोपिंग रोधी विभाग में कई वर्षों तक सेवा दी।
परिवार में खेल का जज्बा: पत्नी जेनिफर डटन और बेटे लिएंडर पेस
Vece Paes की शादी जेनिफर डटन से हुई, जो खुद एक प्रतिभाशाली बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं। जेनिफर ने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भारतीय बास्केटबॉल टीम का नेतृत्व किया और कप्तानी भी निभाई। उनकी संतान लिएंडर पेस ने टेनिस में भारत का नाम विश्व स्तर पर चमकाया है। लिएंडर ने मिक्स्ड डबल्स में चारों ग्रैंडस्लैम खिताब जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है।
खेल के प्रति लगाव और कारों का शौक
Vece Paes और उनके बेटे लिएंडर पेस दोनों को कारों का शौक था। लिएंडर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता के पास 70 के दशक में एक एम्बेसडर कार थी, जिसकी वे दोनों देखभाल करते थे। यह छोटी-छोटी यादें उनके रिश्ते की गहराई और खेल के प्रति उनके जुनून को दर्शाती हैं।
खेल जगत में शोक की लहर
Vece Paes के निधन से भारतीय खेल परिवार में गहरा शोक है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा, खेल के प्रति समर्पण और चिकित्सा क्षेत्र में योगदान सदैव याद किया जाएगा। वे एक ऐसे खिलाड़ी और वैज्ञानिक थे जिन्होंने भारतीय खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।





