टेक-ऑफ और लैंडिंग के वक्त फ्लाइट की खिड़कियां क्यों खुली रखते हैं?

क्या आपने कभी सोचा हैं कि टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय फ्लाइट की खिड़कियां खोलने के लिए क्यों कहां जाता हैं?, आपने सोचा भी नहीं होगा कि इसके पीछे एक सीक्योरिटी पर्पज है।

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Flight Windows kept open during take-off and landing
Flight Windows kept open during take-off and landing

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। कई हवाई यात्रियों को यह लगता है कि उड़ान भरने और उतरने के दौरान खिड़की के पर्दे हटाना एक मामूली बात है। लेकिन यह काम सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इसके पीछे कुछ खास कारण हैं। चलिए आज आपको बताते हैं कि टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय फ्लाइट की खिड़कियां क्यों खोली जाती है?

एक्सपर्ट्स की राय 

एविएशन सेफ्टी ऑफिसर सरन उदयकुमार ने Quora पर बताया कि विमान को इमरजेंसी स्थिति में खाली करने के लिए केवल 90 सेकंड का समय मिलता है। इसे सही तरीके से करने के लिए क्रू को विमान के अंदर और बाहर की स्थिति का सही आकलन करना होता है। यह काम तभी आसानी से हो सकता है जब खिड़कियों के पर्दे हटे हों। अगर पर्दे लगे होते हैं तो बाहर क्या हो रहा है यह देख पाना मुश्किल हो जाता है और आपातकालीन के समय इंप्लाइज या क्रू मेंमबर्स को स्थिति का सही अंदाजा नहीं मिल पाता।

सरन उदयकुमार बताते हैं कि यात्री जिज्ञासु होते हैं और वे जल्दी से किसी समस्या का पता लगा सकते हैं। अगर खिड़की के पर्दे हटे होते हैं तो क्रू को बाहर की स्थिति देखने में मदद मिलती है जैसे आग, धुआं, या कोई अन्य खतरा।

क्यों जरूरी है पर्दा हटाना?

एविएशन विशेषज्ञ डेविड रॉबिन्सन बताते हैं कि अगर खिड़की का पर्दा हटा हो तो यात्रियों को बाहर की स्थिति का तुरंत पता चल सकता है। अगर विमान के इंजन में कोई समस्या हो तो यात्रियों को जल्दी जानकारी मिलने से वे सुरक्षित तरीके से निकासी कर सकते हैं।

एयरलाइन पायलट, कारे लोहसे कहते हैं, ‘कुछ मामलों में यात्रियों ने विंग या इंजन की तरफ देखकर तकनीकी समस्याएं देखी हैं। हालांकि, ये घटनाएं बहुत कम होती हैं।’

सीटें सीधी और मेज मोड़ने के लिए क्यों कहां जाता है? 

यात्रियों को यह भी कहा जाता है कि उड़ान भरने और उतरने के दौरान अपनी सीटें सीधी कर लें और अपनी मेजें मोड़ लें, ताकि आपातकाल में जल्दी से बाहर निकला जा सके।

हडसन नदी पर घटना

जनवरी 2009 में फ्लाइट 1549 के यात्रियों को हडसन नदी पर लैंड कराया गया। जिसको बाद मेयर ने इस घटना को ‘मिरेकल इन हडसन’ कहा। विमान में सवार सभी 150 यात्री सुरक्षित बच गए क्योंकि सभी पैसेंजर्स और क्रू ने मिलकर स्थिति को सही तरह से संभाला और पैसेंजर्स की सुरक्षा के लिए सही कदम उठाए।

खिड़की के पर्दे के नियम का इतिहास

1985 में मैनचेस्टर हवाई अड्डे पर ब्रिटिश एयरटूर्स जेट में हुई आग की घटना ने विमानन सुरक्षा में बड़े बदलाव किए। उस दुर्घटना में 55 लोगों की जान चली गई। जांचकर्ताओं ने पाया कि आपातकालीन निकासी में समस्याएं आईं क्योंकि खिड़कियों के पर्दे लगे हुए थे और विमान के बाहर की स्थिति को देखना मुश्किल हो रहा था। इस घटना के बाद कई एयरलाइनों ने उड़ान के दौरान खिड़कियों के पर्दे हटाने का नियम अपनाया।

ICAO और खिड़की के पर्दे

अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन (ICAO) यह सिफारिश करता है कि उड़ान के महत्वपूर्ण चरणों—जैसे टैक्सी, टेकऑफ और लैंडिंग—के दौरान खिड़कियों के पर्दे खोले जाएं। इस सिफारिश को दुनिया भर के कई विमानन नियामकों ने अपनाया है।

KLM की आपत्ति

2017 में डच एयरलाइन KLM ने यूरोपीय वायु सुरक्षा एजेंसी (EASA) से कहा कि खिड़की के पर्दे के नियम को यात्री सुरक्षा ब्रीफिंग से हटा दिया जाए। उन्होंने यह तर्क दिया कि कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि पर्दा खोलना ज्यादा सुरक्षित है। हालांकि, यूरोपीय नियामकों ने इस पर सहमति नहीं जताई और कहा कि खिड़कियों के पर्दे खुले रखने से क्रू और यात्रियों को बाहरी परिस्थितियों को देखने में मदद मिलती है जैसे कि आग, धुआं, या मलबा।

अगर आप किसी विमान में हैं और फ्लाइट अटेंडेंट आपसे खिड़की का पर्दा खोलने के लिए कहें तो यह आपका कानूनी कर्तव्य है कि आप उनका कहना माने ताकि आपातकालीन स्थिति में मदद मिल सके।