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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। GST Council Meeting में सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं, बता दें कि सरकार ने नई कार खरीदने वाले ग्राहकों को जोरदार झटका देते हुए MUV Cars पर 22 प्रतिशत कंपनसेशन सेस लगाने का ऐलान कर दिया है। सरकार के इस फैसले से मल्टी-यूटिलिटी व्हीकल्स को खरीदना अब महंगा हो गया है, जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में कुछ पैरामीटर तय किए गए हैं जैसे कि 1500 सीसी इंजन से ज्यादा पावरफुल गाड़ियों, 4 मीटर से लंबी कारों और 170mm से ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस के साथ आने वाली MUV गाड़ियों पर ही 22 फीसदी सेस लगाया जाएगा।
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सेस से बचने के लिए अब क्या करेंगी कंपनियां?
जीएसटी के 22 फीसदी कंपनसेशन सेस के दायरे में आने की वजह से अर्टिगा, इनोवा और ट्राइबर जैसी कारों की बिक्री पर असर पड़ सकता है, यानी MUV जैसी गाड़ियों की सेल्स में गिरावट देखने को मिल सकती है। सेल्स में गिरावट का सीधा मतलब है कि कंपनियों का घाटा और इसी घाटा से बचने के लिए कंपनियां कुछ बड़े बदलाव कर सकती हैं।
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सेस से बचने के लिए कंपनियां निकाल सकती हैं ये तोड़
सेल्स में गिरावट से बचने के लिए कंपनियां नई रणनीति तैयार करते हुए अपने इन पैरामीटर के तहत आने वाले मॉडल्स को अपग्रेड करने का फैसला ले सकती हैं। अपग्रेड के तहत इन मॉडल्स को 22 फीसदी कंपनसेशन सेस से बचाने के लिए ग्राउंड क्लियरेंस, लंबाई और इंजन की पावर को कम किया जा सकता है। कंपनियों अगर ऐसा फैसला लेती हैं तो इसके पीछे एक ही मकसद होगा कि ग्राहक कंपनियों के इन पॉपुलर मॉडल्स से कीमत में बढ़ोतरी की वजह से दूरी ना बनाए।
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