मस्क हैं तो मुमकिन है! लकवाग्रस्त शख्स ने हाथ हिलाए बिना खेला चेस, जानें न्यूरालिंक ब्रेन चिप का पूरा कमाल

Neuralink Brain Chip: टेक्नोलॉजी दिग्गज और एलन स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क का एक और ड्रीम प्रोजेक्ट साकार हो चुका है। मस्क की कंपनी Neuralink ने यह सफलता हासिल की है।
एलन मस्क और दूसरी तस्वीर में लकवाग्रस्त नोलैंड आर्बांघ ब्नेन चिप के जरिए सिर्फ सोचकर ऑनलाइन शतरंग खेलते हुए।
एलन मस्क और दूसरी तस्वीर में लकवाग्रस्त नोलैंड आर्बांघ ब्नेन चिप के जरिए सिर्फ सोचकर ऑनलाइन शतरंग खेलते हुए। रफ्तार।

नई दिल्ली, रफ्तार। टेक्नोलॉजी दिग्गज और एलन स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क का एक और ड्रीम प्रोजेक्ट साकार हो चुका है। मस्क की कंपनी न्यूरालिंक (Neuralink) ने यह सफलता हासिल की है। न्यूरालिंक का ब्रेन चिप प्रोजेक्ट का ट्रायल सफल हुआ है। न्यूरालिंक ने वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक शख्स सिर्फ सोचकर गेम को कंट्रोल कर रहा और वीडियो गेम खेल रहा है। इस शख्स के दिमाग में न्यूरालिंक का चिप लगाया गया है।

सिर्फ सोचकर वीडियो गेम और ऑनलाइन शतरंज खेल रहा शख्स

वीडियो में देख सकते हैं कि शख्स सोचकर वीडियो गेम और ऑनलाइन शतरंज खेल रहा है। बता दें मस्क का ब्रेन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप न्यूरालिंक है। इसका उद्देश्य उन मरीजों को भी काबिल बनाना है, जो कुछ भी करने में पूरी तरह से अक्षम हैं। न्यूरालिंक चिप की मदद से इंसान सोचकर कई काम कर सकता है। उस इंसान की सोच को कंप्यूटर पर देखा जा सकता है। मस्क ने एक इंटरव्यू में बताया कि कंपनी उन मरीजों के साथ काम शुरू करेगी, जिनमें सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड इंपेयरमेंट या क्वाड्रिप्लेजिया जैसी गंभीर परेशानियां हैं।

एक दुर्घटना के बाद हुई थी स्पाइनल कार्ड इंजरी

यह शख्स नोलैंड आर्बांघ है। वह सोचकर कंप्यूटर पर शतरंज और गेम सिविलाइजेशन VI खेल रहा है। उस शख्स की सोच को डिकोड किया गया, जिसका मतलब था-मैंने वह गेम खेलना छोड़ दिया था। आर्बांघ ने कहा है कि न्यूरालिंक के चिप ने उसकी जिंदगी बदल दी है। उसकी उम्र 29 साल है। आठ साल पहले एक दुर्घटना में उसे स्पाइनल कॉर्ड की इंजरी हुई थी, तब से वह बिस्तर पर है। Neuralink का दावा है कि वह सिर्फ ब्रेन चिप कंपनी नहीं है, बल्कि सोच से कर्सर कंट्रोल की डिवाइस बनाने वाली कंपनी भी है।

जनवरी में इंसान के दिमाग में इम्प्लांट की गई थी चिप

न्यूरालिंक ने जनवरी में इंसान के दिमाग में सर्जरी के जरिए चिप इम्प्लांट की थी। यह डिवाइस छोटे सिक्के के आकार की है। यह इंसानी दिमाग और कंप्यूटर के बीच सीधे कम्युनिकेशन चैनल बनाती है। इसका ट्रायल पूरी तरह से कामयाब हुआ तो इसके माध्यम से दृष्टिहीन लोग देख सकेंगे। पैरालिसिस मरीज चल-फिर सकेंगे। वो कंप्यूटर भी चला सकेंगे। कंपनी ने चिप का नाम 'लिंक' रखा है।

सितंबर 2023 में मिली थी अनुमति

मस्क की ब्रेन-चिप कंपनी न्यूरालिंक को ह्यूमन ट्रायल के लिए सितंबर 2023 में इंडिपेंडेंट इंस्टीट्यूशनल रिव्यू बोर्ड से मंजूरी मिली थी। इसके बाद न्यूरालिंक ह्यूमन ट्रायल के लिए लोगों की भर्ती कर उन पर इस डिवाइस का ट्रायल किया। न्यूरालिंक का कहना है कि उन लोगों पर ट्रायल किया जा रहा, जिनको सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड में चोट या एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) के चलते क्वाड्रिप्लेजिया है।

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